naav kaaghaz ki sahi kuchh to nazar se guzreus se pahle ki ye paani mire sar se guzre | नाव काग़ज़ की सही कुछ तो नज़र से गुज़रे

  - Saadullah Kaleem
नावकाग़ज़कीसहीकुछतोनज़रसेगुज़रे
उससेपहलेकियेपानीमिरेसरसेगुज़रे
फिरसमाअतकोअताकरजरस-ए-गुलकीसदा
क़ाफ़िलाफिरकोईइसराहगुज़रसेगुज़रे
कोईदस्तकसदाकोईतमन्नातलब
हमकिदरवेशथेयूँँभीतिरेदरसेगुज़रे
ग़ैरत-ए-इश्क़तोकहतीहैकिअबआँखखोल
इसकेब'अदअबकोईऔरइधरसेगुज़रे
मैंतोचाहूँवोसर-ए-दश्तठहरहीजाए
परवोसावनकीघटाजैसाहैबरसेगुज़रे
हब्सकीरुतमेंकोईताज़ाहवाकाझोंका
बाद-ओ-बाराँकेख़ुदामेरेभीघरसेगुज़रे
मुझकोमहफ़ूज़रखाहैमिरेछोटेक़दने
जितनेपत्थरइधरआएमिरेसरसेगुज़रे
  - Saadullah Kaleem
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