ai-khuda aisa mo'jiza ho koi | ऐ-ख़ुदा ऐसा मो'जिज़ा हो कोई

  - रूपम कुमार 'मीत'
ऐ-ख़ुदाऐसामो'जिज़ाहोकोई
इश्क़मेंमेरेमुब्तलाहोकोई
इसतरहदेखताहूँमैंउसको
जिसतरहख़्वाबदेखताहोकोई
ऐनमुमकिनहैउसग़ज़लमेंशे'र
मेरेहिस्सेकेकहरहाहोकोई
रबकाजोहरकहाक़ुबूलकरे
उसकेहोटोंपेक्यागिलाहोकोई
गुमशुदालिखकेएकपर्चेपर
मेरीतस्वीरबाँटताहोकोई
शब-ए-फ़ुर्क़तकाग़मलिएघरमें
आजकीरातजागताहोकोई
दस्तरसमेंनहींहैचैन-ओ-सुकूँ
ज़िंदगीग़मकासिलसिलाहोकोई
झूमउठतेहैंदेखकरइसको
नग़मा-ए-ज़िंदगीनशाहोकोई
  - रूपम कुमार 'मीत'
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