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Rudransh Trigunayat
main hooñ naakaam ladka aur phir naakaam bhi itnana maine naukri paai na vo sahmat hui mujhse
main hooñ naakaam ladka aur phir naakaam bhi itnana maine naukri paai na vo sahmat hui mujhse | मैं हूँ नाकाम लड़का और फिर नाकाम भी इतना
- Rudransh Trigunayat
मैं
हूँ
नाकाम
लड़का
और
फिर
नाकाम
भी
इतना
न
मैंने
नौकरी
पाई
न
वो
सहमत
हुई
मुझ
सेे
- Rudransh Trigunayat
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हर
चंद
कि
हैं
अदबार
में
हम
कहते
हैं
खुले
बाज़ार
में
हम
हैं
सब
से
बड़े
संसार
में
हम
मज़दूर
हैं
हम
मज़दूर
हैं
हम
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Asrar Ul Haq Majaz
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फूटने
वाली
है
मज़दूर
के
माथे
से
किरन
सुर्ख़
परचम
उफ़ुक़-ए-सुब्ह
पे
लहराते
हैं
Ali Sardar Jafri
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बहुत
संजो
के
रक्खा
है
इन्हें
गुल्लक
में
इस
दिल
के
तुम्हारी
याद
के
सिक्के
मेरी
पहली
कमाई
हैं
Piyush Mishra
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हम
मेहनतकश
इस
दुनिया
से
जब
अपना
हिस्सा
माँगेंगे
इक
बाग़
नहीं,
इक
खेत
नहीं,
हम
सारी
दुनिया
माँगेंगे
Faiz Ahmad Faiz
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होने
दो
चराग़ाँ
महलों
में
क्या
हम
को
अगर
दीवाली
है
मज़दूर
हैं
हम
मज़दूर
हैं
हम
मज़दूर
की
दुनिया
काली
है
Jameel Mazhari
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तसव्वुर
तजरबा
तेवर
तमन्ना
और
तन्हाई
मिलेंगे
फूल
सब
इस
में
ग़ज़ल
गुलदान
है
यारों
पढ़ाई
नौकरी
शादी
फिर
उसके
बाद
दो
बच्चे
हमारी
ज़िन्दगी
इतनी
कहाँ
आसान
है
यारों
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Tanoj Dadhich
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दिल
देख
के
रो
देता
है
मज़दूर
के
बच्चे
जब
फावड़ा
चुन
लेते
हैं
बस्ता
नहीं
चुनते
Bhaskar Shukla
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मैं
ने
मेहनत
से
हथेली
पे
लकीरें
खींचीं
वो
जिन्हें
कातिब-ए-तक़दीर
नहीं
खींच
सका
Umair Najmi
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फ़रिश्ते
से
बढ़
कर
है
इंसान
बनना
मगर
इस
में
लगती
है
मेहनत
ज़ियादा
Altaf Hussain Hali
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ये
परिंदे
भी
खेतों
के
मज़दूर
हैं
लौट
के
अपने
घर
शाम
तक
जाएँगे
Bashir Badr
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बेवजह
बंदिशें
लगाई
नहीं
जाती
एक
लड़की
मुझे
भुलाई
नहीं
जाती
चाहता
हूँ
उसी
से
शादी
मेरी
हो,
सो
इश्क़
में
कुंडली
मिलाई
नहीं
जाती
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Rudransh Trigunayat
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तमाशा
बन
गया
क्या
क्या
हमारा
समय
आया
नहीं
अच्छा
हमारा
बनाता
हूँ
सलीक़े
से
घरौंदे
ठहरता
ही
नहीं
अपना
हमारा
नहीं
देखा
अभी
तक
उस
परी
को
जहाँ
से
तय
हुआ
रिश्ता
हमारा
परिंदों
को
उडाया
क़ैदस
सो
शिकारी
से
हुआ
झगड़ा
हमारा
मुहब्बत
को
मेरी
समझे
नहीं
तुम
तजरबा
ही
रहा
कच्चा
हमारा
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Rudransh Trigunayat
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ग़म
हमें
औलाद
का
है
ग़ैर
से
शिकवा
नहीं
अब
तुम्हें
हम
क्या
बताएं
क्या
परेशानी
हुई
Rudransh Trigunayat
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वो
उस्ताद
है
या
फ़ाज़िल
लगता
है
वो
ही
शख़्स
मुझको
क़ाबिल
लगता
है
हिम्मत
बाँध
कर
आया
हूँ
मैं
वरना
पहले-पहल
मिलना
मुश्किल
लगता
है
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Rudransh Trigunayat
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मैं
रुठूगा
कोई
मुझे
मनायेगा
नहीं
ये
मेरा
ग़म
उसको
कभी
सतायेगा
नहीं
Rudransh Trigunayat
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