yaaden | "यादें"

  - Ritesh kumar
"यादें"
आजफिरयादआए
वोकुछयादपुराने
अबक्याहीकहें
किकितनेहैंप्यारे
जैसेदिखतेहैआसमाँमें
वोचाँद-सितारे
समझलोकुछवैसेही
प्यारेवैसेहीन्यारे
वोबचपनकीरेल
वोबचपनकेखेल
चाहेवोलुका-छिपी
याफिरहोसाथमें
वोपकड़म-पकड़ाई
परक्याकरेंसबतो
बनकररहगईहैं
बसयादें
यादआईवोइकबात
जिससेेहोतीहै
आँखोंमेंबरसात
वोपापाकीडाँट
औरमनानाभीसाथ
जिससेेहमजातेथेडर
फिरहमढूँढनेथेलगते
माँकावोआँचल
जिस
मेंथेहममहफ़ूज
फिरहमदेखतेथे
दूरसेहीछिपकर
औरभीहैंबहुतसीबातें
परक्याकरेंसबतो
बनकररहगईहैं
बसयादें
  - Ritesh kumar
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