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Raushan miyaa'n
paagal kaisa hai ye paagalpan mere hote
paagal kaisa hai ye paagalpan mere hote | पागल कैसा है ये पागलपन मेरे होते
- Raushan miyaa'n
पागल
कैसा
है
ये
पागलपन
मेरे
होते
पहने
ग़ैर
के
चूड़ी
कंगन
मेरे
होते
- Raushan miyaa'n
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उसे
पागल
बनाती
फिर
रही
हो
जिसे
शौहर
बनाना
चाहिए
था
Arvind Inaayat
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जौन
तुम्हें
ये
दौर
मुबारक,
दूर
ग़म-ए-अय्याम
से
हो
एक
पागल
लड़की
को
भुला
कर
अब
तो
बड़े
आराम
से
हो
Jaun Elia
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सियाह
रात
की
सरहद
के
पार
ले
गया
है
अजीब
ख़्वाब
था
आँखें
उतार
ले
गया
है
है
अब
जो
ख़ल्क़
में
मजनूँ
के
नाम
से
मशहूर
वो
मेरी
ज़ात
से
वहशत
उधार
ले
गया
है
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Abhishek shukla
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तिरे
होंटों
की
सुर्ख़ी
देख
कर
तो
ऐसा
लगता
है
चबाया
हो
किसी
'आशिक़
का
दिल
हिंदा
मिज़ाजी
से
Meem Maroof Ashraf
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एक
नया
'आशिक़
है
उसका,
जान
छिड़कता
है
उसपर
मुझको
डर
है
वो
भी
इक
दिन
मय-ख़ाने
से
निकलेगा
Siddharth Saaz
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अनोखी
वज़्अ
है
सारे
ज़माने
से
निराले
हैं
ये
'आशिक़
कौन
सी
बस्ती
के
या-रब
रहने
वाले
हैं
Allama Iqbal
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तुम
मुझे
छोड़
के
जाओगे
तो
मर
जाऊँगा
यूँँ
करो
जाने
से
पहले
मुझे
पागल
कर
दो
Bashir Badr
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दौलत
शोहरत
बीवी
बच्चे
अच्छा
घर
और
अच्छे
दोस्त
कुछ
तो
है
जो
इन
के
बाद
भी
हासिल
करना
बाक़ी
है
कभी-कभी
तो
दिल
करता
है
चलती
रेल
से
कूद
पड़ूॅं
फिर
कहता
हूॅं
पागल
अब
तो
थोड़ा
रस्ता
बाक़ी
है
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Zia Mazkoor
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'आशिक़
का
ख़त
है
पढ़ना
ज़रा
देख-भाल
के
काग़ज़
पे
रख
दिया
है
कलेजा
निकाल
के
LALA RAKHA RAM BARQ
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रोज़
तारों
को
नुमाइश
में
ख़लल
पड़ता
है
चाँद
पागल
है
अँधेरे
में
निकल
पड़ता
है
Rahat Indori
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बस
यही
कह
के
मर
गया
रौशन
पूछता
कोई
हाल
दिल
का
भी
Raushan miyaa'n
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तुम
अलग
हो
यार
उन
सब
बाक़ियों
से
इश्क़
तुम
से
है
था
मतलब
बाक़ियों
से
तेरे
दीवाने
का
'आशिक़
का
तिरे
यूँँ
मुख़्तलिफ़
क्यूँँ
फ़ैसला
रब
बाक़ियों
से
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Raushan miyaa'n
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घर-घर
कि
फोड़
मटकी
माखन
को
खा
गया
देखो
सखी
सयाना
मुँह
धो
कर
आ
गया
Raushan miyaa'n
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हाल
अपना
भी
है
दिवाने
सा
पास
होता
नहीं
सुनाने
सा
छीन
लूँगा
तुम्हारे
मुँह
से
मैं
गर
सुनूँगा
ग़ज़ल
सजाने
सा
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Raushan miyaa'n
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मैं
वीराँ
पड़े
आशियाँ
सा
हुआ
ग़ज़ल-दर-ग़ज़ल
बे-ज़बाँ
सा
हुआ
Raushan miyaa'n
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