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Rakesh Mahadiuree
dilbari ka kaam bhi kya khoob hai meraa
dilbari ka kaam bhi kya khoob hai meraa | दिलबरी का काम भी क्या ख़ूब है मेरा
- Rakesh Mahadiuree
दिलबरी
का
काम
भी
क्या
ख़ूब
है
मेरा
पास
मेरे
जान
के
बैठा
करे
कोई
- Rakesh Mahadiuree
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जाँन-ए-जाँ
एक
नज़र
शाम
के
बाद
मुझको
जाना
है
मग़र
शाम
के
बाद
सर्द
रातों
को
लिहाफ़ों
से
है
बैर
तुमको
भी
होगी
ख़बर
शाम
के
बाद
आज
फिर
दोस्त
कहीं
कोई
छला
टूट
जाते
हैं
जिगर
शाम
के
बाद
सर्द
रातों
को
भी
अँगड़ाई
न
हो
जब
हो
बे-कैफ़
नज़र
शाम
के
बाद
और
इक
रात
तमाशा
करो
आज
क्या
पता
हो
ही
ख़बर
शाम
के
बाद
अब
तो
मिलने
का
इरादा
भी
है
नइँ
कितनी
डरती
है
नज़र
शाम
के
बाद
और
क्या
होगा
अगर
हम
ही
न
हों
लोग
जाते
ही
हैं
घर
शाम
के
बाद
ख़ैर
ये
मौत
मेरे
सर
से
टली
कितना
दिलकश
है
नगर
शाम
के
बाद
तू
भी
ऐ
दोस्त
कभी
ईद
मना
देख
ले
तू
भी
क़मर
शाम
के
बाद
दिल-ए-नादाँ
नहीं
इतना
नहीं
है
हो
ही
जाती
है
सहर
शाम
के
बाद
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Rakesh Mahadiuree
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जान-ए-मन
मैं
आइनों
में
भी
तुम्हारा
रूप
देखता
जो
हूँ
कभी
तो
इल्तिजा
के
साथ
Rakesh Mahadiuree
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मैं
भी
आदम
हूँ
कि
मुझको
भी
बुरा
लगता
है
मेरे
मालिक
मुझे
इज़्ज़त
से
बुलाया
कीजे
Rakesh Mahadiuree
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नक़्ल
किए
तो
वक़्त
में
मारे
जाओगे
सबको
अपनी
फ़ितरत
ज़िंदा
रखती
है
Rakesh Mahadiuree
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मुहब्बत
से
गले
मिलकर
के
रोना
लाज़मी
लेकिन
नई
बुनियाद
को
ठंडी
हवा
से
चोट
लगती
है
Rakesh Mahadiuree
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