haal-e-dil | "हाल-ए-दिल"

  - Rakesh Mahadiuree
"हाल-ए-दिल"
मेरीदिलरुबा
तुमख़ूब-सूरतहो
सूरतसेनहींसीरतसे
मुझेतुम्हारीसीरतसेमुहब्बतहै
इसीलिएसीरतकाजानताहूँ
शर्मदहशतपरेशानी
जिन्हेंसुख़नवरोंकवियोंनेइश्क़कीलज़्ज़तबतायाहै
फ़िलहालयेमेरेदरमियाँरहेहैं
बहरहाल
मेरीचाहतेंतुम्हारेनफ़समेंधड़कतीहैं
ज़िंदारहतीहैं
मैंनेतुम्हेंदेखाहैदेखतेहुए
मुझेचाहतेहुए
मुझेसोचतेहुए
औरमेरेलिएपरेशानहोतेहुए
वैसेचाहतहोतोकहनालाज़मीहोताहै
ज़रूरीहोताहै
लेकिनइश्क़कीक़ायनातमेंलफ़्ज़ख़ामोशरहतेहैं
औरनिग़ाहेंबातकरलेतीहैं
मुझेपताहैएकदिनतुममेरीनिग़ाहोंसेबातकरलोगी
पूछलोगी
औरतुम्हेंजवाबमिलेगा
हाँ
मैंभीचाहताहूँ
ख़ूबचाहताहूँ
वैसेमैंभी
अपनेनग़्मोंअपनीग़ज़लोंमें
मुहब्बतख़ूबलिखताहूँ
हालाँकिसदाक़तयेहै
किमैंभीकहनेमेंख़ौफ़खाताहूँ
वैसेबुरामानना
किमैंनेतुमसेेकभीइज़हारनहींकिया
सोचलेनाकिथियोरीऔरप्रैक्टिकलमेंफ़र्क़होताहै
ख़ैर
अबजोमेरामौज़ुदाहालहैवोयेहै
किआएदिनदिलऔरदिमाग़मसअलाखड़ाकरदेतेहैं
दिलकहताहैतुमख़ूब-सूरतहो
दिमाग़कहताहैमंज़िलपेइख़्तियारकरो
बहरहाल
तुमख़ूब-सूरतहो
तुमज़ियादाख़ूब-सूरतहो
तुमसबसेेज़ियादाख़ूब-सूरतहो
तुमहीख़ूब-सूरतहो
  - Rakesh Mahadiuree
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