ye sochna fuzool hai kispar ghazal gaii | ये सोचना फ़ुज़ूल है किसपर ग़ज़ल गई

  - Rakesh Mahadiuree
येसोचनाफ़ुज़ूलहैकिसपरग़ज़लगई
येदोस्तशाम-ए-ग़महैकिसीओरचलगई
मैंतुमसेेअबभीबोलताहूँबाततोकरो
फिरयेबोलनाकिमेरीजाँबदलगई
मैंसोचताथालड़कियाँछायाहैंचाँदकी
येलड़कीमेरेसोचसेआगेनिकलगई
जबतकमुझेयेज़िंदगीआईसमझमेंदोस्त
तबतकयेज़िंदगीनएकरवटबदलगई
कबमैंनेसोचाज़िंदगीइतनीहसीनहै
तूगयाक़रीबतोहसरतमचलगई
जबतुमनेमेरीजानमुझेबे-वफ़ाकहा
आँखोंकेसामनेकोईलैलानिकलगई
  - Rakesh Mahadiuree
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