मुहब्बतकोसज़ाबतलारहेहैं
येलड़केइश्क़सेघबरारहेहैं
मुहब्बतक्याहैकोईहमसेेपूछो
दिलोंसेकूचकरकेआरहेहैं
मैंउनकीयादमेंखोयाहुआहूँ
ग़ज़लमेंशे'रबढ़तेजारहेहैं
जहाँतर्क-ए-त'अल्लुक़होगयाथा
वोहमकोफिरवहींबुलवारहेहैं
अभीकलहीतोमिलकेआरहाहूँ
वोमुझसेेइश्क़फिरफ़रमारहेहैं
मैंसबकुछजानकरनादाँबनाहूँ
वोमुझकोबारहासमझारहेहैं
मैंउनकोदेखकरमुस्कारहाहूँ
वोमुझकोदेखकरजलजारहेहैं
मुहब्बतकरनेकीजल्दीथीजिनको
मुहब्बतकरकेवोपछतारहेहैं
ग़ज़ल'राकेश'सेसुननीहैइनको
मगरयेलोगतोशर्मारहेहैं