आँख को बर्तन समझ लो

  - Rakesh Mahadiuree
आँखकोबर्तनसमझलो
चाँदकोकंगनसमझलो
येपूछोआत्मक्याहै
देहकादर्पणसमझलो
देखलोखिलतेचमनको
देखकरजीवनसमझलो
मैंतुम्हेंक्यूँचाहताहूँ
एकप्यारा-पनसमझलो
हमजहाँमिलतेथेप्रियवर
अबउसेमधुबनसमझलो
रातमेरीक्यालगेगी
मौसमीदुश्मनसमझलो
रातरानीक्यालगेगी
मेरीइकदुल्हनसमझलो
फूलक्याहैख़ारक्याहै
एकउरदोतनसमझलो
अबकभीमिलनाहोगा
आख़िरीदर्शनसमझलो
चाहेकहलोकल्पनाहै
चाहेइसकोफ़नसमझलो
  - Rakesh Mahadiuree
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