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Raj Tiwari
sunaata hai samandar ik kahaanii har kinaare par
sunaata hai samandar ik kahaanii har kinaare par | सुनाता है समुंदर इक कहानी हर किनारे पर
- Raj Tiwari
सुनाता
है
समुंदर
इक
कहानी
हर
किनारे
पर
कभी
कोई
तो
आया
था
बनाने
घर
किनारे
पर
फ़लक
से
चाँद
उतरा
रक़्स
करते
इस
समुंदर
में
सितारे
देखने
आए
वही
मंज़र
किनारे
पर
- Raj Tiwari
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कुछ
इशारा
जो
किया
हम
ने
मुलाक़ात
के
वक़्त
टाल
कर
कहने
लगे
दिन
है
अभी
रात
के
वक़्त
Insha Allah Khan
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जब
भी
कहता
हूँ
कब
मिलेंगे
हम
टाल
देता
है
क्या
पता
कह
कर
Shadab Javed
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तुम्हारी
याद
के
गहरे
भँवर
में
तख़य्युल
रक़्स
करना
चाहता
है
Gaurav Singh
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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हो
न
हो
एक
ही
तस्वीर
के
दो
पहलू
हैं
रक़्स
करता
हुआ
तू
आग
में
जलता
हुआ
मैं
Shahid Zaki
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चाहे
हो
आसमान
पे
चाहे
ज़मीं
पे
हो
वहशत
का
रक़्स
हम
ही
करेंगे
कहीं
पे
हो
दिल
पर
तुम्हारे
नाम
की
तख़्ती
लगी
न
थी
फिर
भी
ज़माना
जान
गया
तुम
यहीं
पे
हो
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Nirmal Nadeem
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ये
तुमने
कैसा
बना
कर
हमें
किया
है
गुम
ख़ुशी
से
झूम
उठेगा
जिसे
मिलेंगे
हम
Swapnil Tiwari
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कुछ
ख़ुशियाँ
कुछ
आँसू
दे
कर
टाल
गया
जीवन
का
इक
और
सुनहरा
साल
गया
Unknown
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किस
ने
भीगे
हुए
बालों
से
ये
झटका
पानी
झूम
के
आई
घटा
टूट
के
बरसा
पानी
Arzoo Lakhnavi
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ज़ब्त
करो
गर
ग़म
के
बादल
छाए
हैं,
रक़्स
करो
के
बारिश
आने
वाली
है
Darpan
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उम्र
की
सीढ़ियाँ
मैं
चढ़ता
रहा
ज़िंदगी
इस
तरह
फिसलती
रही
साल
दर
साल
जन्मदिन
आया
जीने
की
आस
आँख
मलती
रही
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Raj Tiwari
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ज़िंदगी
शा'इरी
में
हम
ने
लगा
दी
'अज़लान'
मिला
कुछ
भी
न
ये
ज़ंजीर
सजाने
के
बाद
Raj Tiwari
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भूलने
का
हुनर
नहीं
आया
इसलिए
मैं
भुला
नहीं
पाया
Raj Tiwari
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पिघलती
बर्फ़
की
ये
दास्ताँ
हम
को
बताती
है
जुदा
होना
ही
पड़ता
है
यहाँ
पानी
को
पानी
से
Raj Tiwari
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फूलों
के
जिस्म
पे
शबनम
की
तरह
बैठी
हुई
ज़रा-सी
धूप
से
ओझल
हो
गई
मेरी
ख़ुशी
शाम
को
दोनों
किसी
मोड़
पे
चल
मिलते
हैं
मैं
भी
दिन
भर
का
थका-हारा
तू
भी
रात
जगी
नींद
में
होंठों
से
उस
ने
मिरी
आँखों
को
छुआ
मेरी
पलकों
से
महक
चाँदनी
की
आती
रही
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Raj Tiwari
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