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Raj Tiwari
kisi kashtii ka agar ham ko sahaara milta
kisi kashtii ka agar ham ko sahaara milta | किसी कश्ती का अगर हम को सहारा मिलता
- Raj Tiwari
किसी
कश्ती
का
अगर
हम
को
सहारा
मिलता
हम
को
भी
दरिया
का
कोई
तो
किनारा
मिलता
बचा
रक्खा
है
तुम्हारे
लिए
हम
ने
ख़ुद
को
वरना
हम
को
भी
यहाँ
कोई
हमारा
मिलता
- Raj Tiwari
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कहीं
से
दुख
तो
कहीं
से
घुटन
उठा
लाए
कहाँ-कहाँ
से
न
दीवानापन
उठा
लाए
अजीब
ख़्वाब
था
देखा
के
दर-ब-दर
हो
कर
हम
अपने
मुल्क
से
अपना
वतन
उठा
लाए
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Farhat Abbas Shah
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मुझे
अपना
किनारा
कम
था
'दानिश'
बढ़ा
ली
मैंने
फिर
गहराई
अपनी
Madan Mohan Danish
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सियाह
रात
की
सरहद
के
पार
ले
गया
है
अजीब
ख़्वाब
था
आँखें
उतार
ले
गया
है
है
अब
जो
ख़ल्क़
में
मजनूँ
के
नाम
से
मशहूर
वो
मेरी
ज़ात
से
वहशत
उधार
ले
गया
है
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Abhishek shukla
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कभी
तो
नस्ल-ओ-वतन-परस्ती
की
तीरगी
को
शिकस्त
होगी
कभी
तो
शाम-ए-अलम
मिटेगी
कभी
तो
सुब्ह-ए-ख़ुशी
मिलेगी
Abul mujahid zaid
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हमने
तुझ
पे
छोड़
दिया
है
कश्ती,
दरिया,
भँवर,
किनारा
Siddharth Saaz
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मुसलसल
तजरबों
का
है
नतीजा
मैं
दरया
से
किनारा
हो
गया
हूँ
Madan Mohan Danish
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उस
मुल्क
की
सरहद
को
कोई
छू
नहीं
सकता
जिस
मुल्क
की
सरहद
की
निगहबान
हैं
आँखें
Unknown
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ख़ाक
हो
जाएँगे
हम
ख़ाक
में
मिल
कर
तेरी
तुझ
सेे
रिश्ता
न
कभी
अरज़े
वतन
टूटेगा
Hashim Raza Jalalpuri
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गुजर
चुकी
जुल्मते
शब-ए-हिज्र,
पर
बदन
में
वो
तीरगी
है
मैं
जल
मरुंगा
मगर
चिरागों
के
लो
को
मध्यम
नहीं
करूँगा
यह
अहद
लेकर
ही
तुझ
को
सौंपी
थी
मैंने
कलबौ
नजर
की
सरहद
जो
तेरे
हाथों
से
कत्ल
होगा
मैं
उस
का
मातम
नहीं
करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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तुम
भला
उस
प्रेम
की
गहराई
क्या
समझोगे
जानाँ
जो
कभी
ख़्वाबों
में
भी
अपनी
न
सरहद
लाँघता
है
Harsh saxena
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कंधे
पर
बस्ता
लिए
आते
हैं
बच्चे
मुस्कुराकर
ज़िंदगी
कैसे
जिएँ
बच्चे
सिखाते
मुस्कुराकर
Raj Tiwari
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'मीर'
जिन
के
अज़ीज़
होते
हैं
इश्क़
के
वो
मरीज़
होते
हैं
Raj Tiwari
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ज़बाँ
दिल
की
यहाँ
पर
कौन
समझे
ख़मोशी
को
यहाँ
सब
मौन
समझे
Raj Tiwari
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वक़्त
पर
कामयाब
होना
दोस्त
वक़्त
वरना
बहुत
लगेगा
दोस्त
Raj Tiwari
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बुझा
बुझा
चराग़
है
कि
जैसे
शब
का
ख़्वाब
है
ज़मीं
पे
ये
जो
जल
रहा
ये
किस
का
आफ़ताब
है
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Raj Tiwari
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