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Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
lad to loonga andhere se main par
lad to loonga andhere se main par | लड़ तो लूँगा अँधेरे से मैं पर
- Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
लड़
तो
लूँगा
अँधेरे
से
मैं
पर
रौशनी
आँख
पे
ही
पड़ी
है
- Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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मुझ
पर
निगाह-ए-नाज़
का
जब
जादू
चल
गया
मैं
रफ़्ता
रफ़्ता
क़ैस
की
सोहबत
में
ढल
गया
ज़ुल्फें
उन्होंने
खोल
के
बिखराई
थी
शजर
फिर
देखते
ही
देखते
मौसम
बदल
गया
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Shajar Abbas
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वो
मेरी
पीठ
में
ख़ंजर
ज़रूर
उतारेगा
मगर
निगाह
मिलेगी
तो
कैसे
मारेगा
Waseem Barelvi
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माँ
जैसे
देखती
हो
तुम
मगर
मैं
तुम्हारी
आँख
का
तारा
नहीं
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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हुस्न
को
भी
कहाँ
नसीब
'जिगर'
वो
जो
इक
शय
मिरी
निगाह
में
है
Jigar Moradabadi
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सलीक़ा
तो
नहीं
मालूम
हम
को
दीद
का
लेकिन
झुकाती
है
नज़र
को
जब
नज़र
भर
देखते
हैं
हम
Sandeep dabral 'sendy'
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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कभी
पहले
नहीं
था
जिस
क़दर
मजबूर
हूँ
मैं
आज
नज़र
आऊँ
न
ख़ुद
क्या
तुम
सेे
इतना
दूर
हूँ
मैं
आज
तुम्हारे
ज़ख़्म
को
ख़ाली
नहीं
जाने
दिया
मैंने
तुम्हारी
याद
में
ही
चीख़
के
मशहूर
हूँ
मैं
आज
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SHIV SAFAR
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है
राम
के
वजूद
पे
हिन्दोस्ताँ
को
नाज़
अहल-ए-नज़र
समझते
हैं
उस
को
इमाम-ए-हिंद
Allama Iqbal
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मैं
नज़र
से
पी
रहा
था
तो
ये
दिल
ने
बद-दुआ
दी
तिरा
हाथ
ज़िंदगी
भर
कभी
जाम
तक
न
पहुँचे
Shakeel Badayuni
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किस
से
जा
कर
माँगिये
दर्द-ए-मोहब्बत
की
दवा
चारा-गर
अब
ख़ुद
ही
बेचारे
नज़र
आने
लगे
Shakeel Badayuni
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मैंने
उसको
लौ
दिखाई
और
फिर
वो
चराग़ों
को
बुझा
के
आ
गया
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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जानता
हूँ
तेरी
अब
तलब
कुछ
नहीं
मैं
तेरा
ख़्वाब
था
लेकिन
अब
कुछ
नहीं
जब
ये
बादल
न
थे
यूँँ
समझता
था
मैं
बस
सितारे
ही
हैं
और
शब
कुछ
नहीं
आप
ही
मुझको
रस्ते
पे
लाये
थे
और
आप
ही
कह
गए
आगे
अब
कुछ
नहीं
वो
अगर
पूछ
ले
क्या
हुआ
है
मुझे
बोल
देना
उसे
आप
सब
कुछ
नहीं
कुछ
नया
इस
में
'रजनीश'
क्या
है
बता
जब
परेशाँ
है
तू
और
सबब
कुछ
नहीं
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Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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रात
भर
बूढ़ों
के
घर
में
रौशनी
थी
गाँव
में
चर्चे
थे
बेटे
आ
रहे
हैं
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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सच
बता
देते
तुम
तो
क्या
होता
हद
से
हद
ये
कि
मैं
ख़फ़ा
होता
यारों
हम
सब
तो
साथ
वाले
थे
कोई
तो
साथ
भी
रहा
होता
प्यार
तो
काम
था
मेरा
पर
मैं
आदमी
भी
तो
काम
का
होता
फ़ाख़्ता
या
तो
मेरे
होते
पंख
या
तो
तुझ
में
ही
हौसला
होता
बेशक
उसने
कहानी
पढ़
ली
थी
काश
उनवान
भी
पढ़ा
होता
ख़्वाब
ही
ने
जगा
के
रक्खा
है
वर्ना
आदम
तो
सो
चुका
होता
बिन
मोहब्बत
के
जी
रहे
थे
हम
अपना
होता
भी
कुछ
तो
क्या
होता
क़ैस
लैला
का
कौन
होता
जो
वो
दुनिया-दारी
में
फँस
गया
होता
वैसे
चिड़िया
को
गोद
लेने
से
अच्छा
ये
था
उड़ा
दिया
होता
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Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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ये
हम
जो
हँस
रहे
हैं
बेबसी
पर
हमारा
तंज़
है
इस
ज़िंदगी
पर
हुआ
ऐसा
अमावस-रात
थी
वो
और
अपने
को
यक़ीं
था
चाँदनी
पर
नज़र
तो
हम
भी
आ
जाते
उसे
जो
बराबर
रौशनी
पड़ती
सभी
पर
नए
तो
हैं
यक़ीनन
इसलिए
आप
भरोसा
कर
रहे
हैं
ख़ुद-कुशी
पर
अभी
जीवन
से
तू
महरूम
है
यार
तभी
इतरा
रहा
है
मय-कशी
पर
सितम
अब
ये
है
वो
लौट
आया
है
और
हमारा
आ
गया
है
दिल
किसी
पर
किसी
से
तुम
मोहब्बत
कर
लो
वर्ना
सवाल
उठता
रहेगा
दोस्ती
पर
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Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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