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Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
jab use KHat mere mile honge
jab use KHat mere mile honge | जब उसे ख़त मेरे मिले होंगे
- Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
जब
उसे
ख़त
मेरे
मिले
होंगे
सब
शजर
फूल
से
खिले
होंगे
बाद
मेरे
हुआ
तो
क्या
होगा
शाख़
पत्ते
सभी
हिले
होंगे
प्यार
में
साथ
होंगी
बस
दो
जाँ
इक
तरफ़
फौज
काफ़िले
होंगे
हम
सेफ़र
के
गुनाह
भी
अच्छे
पाँव
रस्तों
में
ही
छिले
होंगे
इसलिए
ये
जहाँ
नहीं
मेरा
मौत
पर
भी
इसे
गिले
होंगे
देखना
तुम
दयार
में
अपने
एक-दो
और
भी
ज़िले
होंगे
हश्र
'रजनीश'
यूँँ
है
उल्फ़त
का
मात
खाने
के
सिलसिले
होंगे
- Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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काँटों
से
दिल
लगाओ
जो
ता-उम्र
साथ
दें
फूलों
का
क्या
जो
साँस
की
गर्मी
न
सह
सकें
Akhtar Shirani
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इतना
मसरूफ़
हूँ
जीने
की
हवस
में
'शाहिद'
साँस
लेने
की
भी
फ़ुर्सत
नहीं
होती
मुझ
को
Shahid Zaki
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इतनी
मिलती
है
मिरी
ग़ज़लों
से
सूरत
तेरी
लोग
तुझ
को
मिरा
महबूब
समझते
होंगे
Bashir Badr
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सुन
लिया
कैसे
ख़ुदा
जाने
ज़माने
भर
ने
वो
फ़साना
जो
कभी
हमने
सुनाया
भी
नहीं
Qateel Shifai
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इस
दौर-ए-सियासत
का
इतना
सा
फ़साना
है
बस्ती
भी
जलानी
है
मातम
भी
मनाना
है
Unknown
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हमारे
साँस
भी
ले
कर
न
बच
सके
अफ़ज़ल
ये
ख़ाक-दान
में
दम
तोड़ते
हुए
सिगरेट
Afzal Khan
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क्या
जाने
किस
ख़ता
की
सज़ा
दी
गई
हमें
रिश्ता
हमारा
दार
पे
लटका
दिया
गया
शादी
में
सब
पसंद
का
लाया
गया
मगर
अपनी
पसंद
का
उसे
दूल्हा
नहीं
मिला
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Afzal Ali Afzal
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हर
क़दम
हर
साँस
गिरवी
ज़िंदगी
रहम-ओ-करम
इतने
एहसानों
पे
जीने
से
तो
मर
जाना
सही
Ajeetendra Aazi Tamaam
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जीत
भी
लूँ
गर
लड़ाई
तुम
से
मैं
तो
क्या
मिलेगा
हाथ
में
दोनों
के
बस
इक
टूटा
सा
रिश्ता
मिलेगा
कर
के
लाखों
कोशिशें
गर
जो
बचा
भी
लूँ
मैं
रिश्ता
तो
नहीं
फिर
मन
हमारा
पहले
के
जैसा
मिलेगा
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Ankit Maurya
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इक
लफ़्ज़-ए-मोहब्बत
का
अदना
ये
फ़साना
है
सिमटे
तो
दिल-ए-आशिक़
फैले
तो
ज़माना
है
Jigar Moradabadi
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मैंने
उसको
लौ
दिखाई
और
फिर
वो
चराग़ों
को
बुझा
के
आ
गया
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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एक
अँधेरे
घर
में
हैं
हम
जिस
का
दरीचा
कुछ
छोटा
है
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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वो
समझता
है
वो
आगे
आ
गया
सच
मगर
ये
है
मैं
पहले
आ
गया
अम्न
के
रस्ते
पे
थे
हम
पर
तभी
जंग
का
फ़रमान
फिर
से
आ
गया
मैं
नहीं
रोया
गुज़रते
वक़्त
पे
वक़्त
ख़ुद
मुझको
रुलाने
आ
गया
पड़
गया
था
नाम
तेरा
कान
में
और
मैं
मजलिस
में
आगे
आ
गया
मैंने
उसको
लौ
दिखाई
और
फिर
वो
चराग़ों
को
बुझा
के
आ
गया
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Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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मैं
तेरा
और
तू
मेरा
न
हुआ
पर
ये
तो
ठीक
फ़ैसला
न
हुआ
हाल
तो
ठीक
है
मगर
ये
न
पूछ
बाद
तेरे
यहाँ
पे
क्या
न
हुआ
मैं
वो
पत्ता
हूँ
इक
दरख़्त
का
जो
ना-तवाँ
होके
भी
जुदा
न
हुआ
इश्क़
का
काम
दे
दिया
उसको
क्या
पता
अब
हुआ
हुआ
न
हुआ
ज़िन्दगी
सहल
हो
गई
मेरे
बाद
फिर
मुसीबत
से
सामना
न
हुआ
इक
मेरा
दुख
है
और
वो
ये
कि
मैं
भूलकर
भी
तुझे
फ़ना
न
हुआ
तेरा
तू
जान
पर
मेरे
लिए
तो
तू
बुरा
हो
के
भी
बुरा
न
हुआ
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हम
सेफ़र
के
गुनाह
भी
अच्छे
पाँव
रस्तों
में
ही
छिले
होंगे
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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