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Rajesh Reddy
der tak hanste rahe aalampnaah
der tak hanste rahe aalampnaah | देर तक हँसते रहे आलमपनाह
- Rajesh Reddy
देर
तक
हँसते
रहे
आलमपनाह
डर
के
मारे
मस्ख़रे
रोने
लगे
- Rajesh Reddy
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मैं
बार
बार
तुझे
देखता
हूॅं
इस
डर
से
कि
पिछली
बार
का
देखा
हुआ
ख़राब
न
हो
Shaheen Abbas
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ज़िंदगी
भर
वो
उदासी
के
लिए
काफ़ी
है
एक
तस्वीर
जो
हँसते
हुए
खिंचवाई
थी
Yasir Khan
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मैं
हूँ
दिल
है
तन्हाई
है
तुम
भी
होते
अच्छा
होता
Firaq Gorakhpuri
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गुज़ार
देते
हैं
रातें
पहलू
में
उसके
जुगनू
को
भी
दर
का
फ़क़ीर
बना
रखा
है
ALI ZUHRI
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मेरे
ही
संग-ओ-ख़िश्त
से
तामीर-ए-बाम-ओ-दर
मेरे
ही
घर
को
शहर
में
शामिल
कहा
न
जाए
Majrooh Sultanpuri
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भूचाल
की
धमकी
का
अगर
डर
है
तो
लोगों
इन
कच्चे
मकानों
को
गिरा
क्यूँ
नहीं
देते
Gyan Prakash Vivek
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एक
नया
'आशिक़
है
उसका,
जान
छिड़कता
है
उसपर
मुझको
डर
है
वो
भी
इक
दिन
मय-ख़ाने
से
निकलेगा
Siddharth Saaz
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वही
मंज़िलें
वही
दश्त
ओ
दर
तिरे
दिल-ज़दों
के
हैं
राहबर
वही
आरज़ू
वही
जुस्तुजू
वही
राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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आ
जाए
कौन
कब
कहाँ
कैसी
ख़बर
के
साथ
अपने
ही
घर
में
बैठा
हुआ
हूँ
मैं
डर
के
साथ
Pratap Somvanshi
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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परिन्दे
होते
तो
डाली
पर
लौट
भी
जाते
हमें
न
याद
दिलाओ
कि
शाम
हो
गई
है
Rajesh Reddy
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आसमाँ
ने
बंद
कर
लीं
खिड़कियाँ
अब
ज़मीं
में
उसकी
दिलचस्पी
नहीं
Rajesh Reddy
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आख़िर
तो
डूबना
ही
था
काग़ज़
की
नाव
को
इल्ज़ाम
देते
रहिए
नदी
के
बहाव
को
दिल
के
धुऐं
को
आँखों
में
आने
नहीं
दिया
आसाँ
नहीं
था
साधना
इस
रख-रखाव
को
बन
आई
जाँ
पे
जब
पड़ा
सामान
बाँधना
मंज़िल
समझ
के
बैठ
गए
थे
पड़ाव
को
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Rajesh Reddy
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जितनी
बटनी
थी
बट
चुकी
ये
ज़मीं
अब
तो
बस
आसमान
बाक़ी
है
Rajesh Reddy
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नई
लाशें
बिछाने
के
लिए
ही
गड़े
मुर्दे
उखाड़े
जा
रहे
हैं
Rajesh Reddy
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