sirf sach aur jhooth ki mizaan men rakhe rahe | सिर्फ़ सच और झूट की मीज़ान में रक्खे रहे

  - Rahat Indori
सिर्फ़सचऔरझूटकीमीज़ानमेंरक्खेरहे
हमबहादुरथेमगरमैदानमेंरक्खेरहे
जुगनुओंनेफिरअँधेरोंसेलड़ाईजीतली
चाँदसूरजघरकेरौशन-दानमेंरक्खेरहे
धीरेधीरेसारीकिरनेंख़ुद-कुशीकरनेलगीं
हमसहीफ़ाथेमगरजुज़्दानमेंरक्खेरहे
बंदकमरेखोलकरसच्चाइयाँरहनेलगीं
ख़्वाबकच्चीधूपथेदालानमेंरक्खेरहे
सिर्फ़इतनाफ़ासलाहैज़िंदगीसेमौतका
शाख़सेतोड़ेगएगुल-दानमेंरक्खेरहे
ज़िंदगीभरअपनीगूँगीधड़कनोंकेसाथसाथ
हमभीघरकेक़ीमतीसामानमेंरक्खेरहे
  - Rahat Indori
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