mujh | मुझ में कितने राज़ हैं बतलाऊँ क्या

  - Rahat Indori
मुझमेंकितनेराज़हैंबतलाऊँक्या
बंदएकमुद्दतसेहूँखुलजाऊँक्या
आजिज़ीमिन्नतख़ुशामदइल्तिजा
औरमैंक्याक्याकरूँँमरजाऊँक्या
तेरेजलसेमेंतेरापरचमलिए
सैकड़ोंलाशेंभीहैंगिनवाऊँक्या
कलयहाँमैंथाजहाँतुमआजहो
मैंतुम्हारीहीतरहइतराऊँक्या
एकपत्थरहैवोमेरीराहका
गरठुकराऊँतोठोकरखाऊँक्या
फिरजगायातूनेसोएशे'रको
फिरवहीलहजादराज़ीआऊँक्या
  - Rahat Indori
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