mujhe dubo ke bahut sharmasaar rahtii hai | मुझे डुबो के बहुत शर्मसार रहती है

  - Rahat Indori
मुझेडुबोकेबहुतशर्मसाररहतीहै
वोएकमौजजोदरियाकेपाररहतीहै
हमारेताक़भीबे-ज़ारहैंउजालोंसे
दिएकीलौभीहवापरसवाररहतीहै
फिरउसकेबा'दवहीबासीमंज़रोंकेजुलूस
बहारचंदहीलम्हेबहाररहतीहै
इसीसेक़र्ज़चुकाएहैंमैंनेसदियोंके
येज़िंदगीजोहमेशाउधाररहतीहै
हमारीशहरकेदानिशवरोंसेयारीहै
इसीलिएतोक़बातारताररहतीहै
मुझेख़रीदनेवालोक़तारमेंआओ
वोचीज़हूँजोपस-ए-इश्तिहाररहतीहै
  - Rahat Indori
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