andar ka zahar choom liya dhul ke aa ga.e | अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए

  - Rahat Indori
अंदरकाज़हरचूमलियाधुलकेगए
कितनेशरीफ़लोगथेसबखुलकेगए
सूरजसेजंगजीतनेनिकलेथेबेवक़ूफ़
सारेसिपाहीमोमकेथेघुलकेगए
मस्जिदमेंदूरदूरकोईदूसराथा
हमआजअपनेआपसेमिल-जुलकेगए
नींदोंसेजंगहोतीरहेगीतमामउम्र
आँखोंमेंबंदख़्वाबअगरखुलकेगए
सूरजनेअपनीशक्लभीदेखीथीपहलीबार
आईनेकोमज़ेभीतक़ाबुलकेगए
अनजानेसाएफिरनेलगेहैंइधरउधर
मौसमहमारेशहरमेंकाबुलकेगए
  - Rahat Indori
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