raheen-e-hasrat-o-hirmaan-o-yaas baithe hain | रहीन-ए-हसरत-ओ-हिरमान-ओ-यास बैठे हैं

  - Rafiq Siraji
रहीन-ए-हसरत-ओ-हिरमान-ओ-यासबैठेहैं
वोशादमाँहैंमगरहमउदासबैठेहैं
करेंतोकैसेयक़ींहमकरेंवफ़ापेतिरी
रक़ीबअबभीतिरेआस-पासबैठेहैं
वोएकतूकिख़ुदअपनीख़तापेरूठगया
परएकहमकिसरापासिपासबैठेहैं
किसीकाजामरहेहैंकिसीकामय-ख़ाना
हमएकउम्रसेख़ुदबनकेप्यासबैठेहैं
तुम्हारेज़िक्रपेजीभरकेरोएचिल्लाए
कुछऐसेदिलकीनिकालेभड़ासबैठेहैं
  - Rafiq Siraji
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