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Rafi Yusufi Mahram
jumaa aur itwaar. laga hai
jumaa aur itwaar. laga hai | जुमा और इतवार लगा है
- Rafi Yusufi Mahram
जुमा
और
इतवार
लगा
है
सस्ता
फिर
बाज़ार
लगा
है
हॉकर
चीज़ें
बीच
रहा
है
अपनी
जानिब
खींच
रहा
है
पांडा
भालू
गुड्डा
भी
है
चाबी
वाला
बुढ्ढा
भी
है
चीन
से
आई
चिड़िया
ले
लो
हाँग-काँग
की
गुड़िया
ले
लो
फूलों
का
गुलदस्ता
भी
है
जेबों
वाला
बस्ता
भी
है
इंजन
देखो
रेल
भी
देखो
जादू
का
ये
खेल
भी
देखो
लूडो
ले
लो
वीडियो
ले
लो
घर
पर
जा
कर
मिल
कर
खेलो
फ़ौरेन
का
हर
आइटम
देखो
घोड़ा-गाड़ी
टम-टम
देखो
अच्छी
है
हर
चीज़
खरी
है
एक
ख़रीदो
एक
फ़्री
है
- Rafi Yusufi Mahram
समझ
के
आग
लगाना
हमारे
घर
में
तुम
हमारे
घर
के
बराबर
तुम्हारा
भी
घर
है
Hafeez Banarasi
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इन
का
उठना
नहीं
है
हश्र
से
कम
घर
की
दीवार
बाप
का
साया
Unknown
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जिसे
तुम
काट
आए
उस
शजर
को
ढूँढता
होगा
परिंदा
लौटकर
के
अपने
घर
को
ढूँढता
होगा
Bhaskar Shukla
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अच्छे
हो
कर
लौट
गए
सब
घर
लेकिन
मौत
का
चेहरा
याद
रहा
बीमारों
को
Shariq Kaifi
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जितने
मर्ज़ी
महँगे
पकवानों
को
खालो
तुम
घर
की
रोटी
तो
फिर
घर
की
रोटी
होती
है
Sarvjeet Singh
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सारी
हिम्मत
टूट
गई,
बच्चों
से
ये
सुनकर
अब
भूखे
पेट
गुज़ारा
करने
की
हिम्मत
है
फूँका
घर,
भूखे
बच्चे,
टूटी
उम्मीदें,
अब
मुझ
में,
रस्सी
को
फंदा
करने
की
हिम्मत
है
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Aman G Mishra
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कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
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लोग
हर
मोड़
पे
रुक
रुक
के
सँभलते
क्यूँँ
हैं
इतना
डरते
हैं
तो
फिर
घर
से
निकलते
क्यूँँ
हैं
मोड़
होता
है
जवानी
का
सँभलने
के
लिए
और
सब
लोग
यहीं
आ
के
फिसलते
क्यूँँ
हैं
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Rahat Indori
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पास
मैं
जिसके
हूँ
वो
फिर
भी,
अच्छा
लड़का
ढूँढ़
रही
है
उसने
लगा
रक्खा
है
चश्मा,
और
वो
चश्मा
ढूँढ़
रही
है
फ़ोन
किया
मैंने
और
पूछा,
अब
तक
घर
से
क्यूँँ
नहीं
निकली
उस
ने
कहा
मुझ
सेे
मिलने
का,
एक
बहाना
ढूँढ़
रही
है
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Tanoj Dadhich
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घर
से
निकले
थे
हौसला
कर
के
लौट
आए
ख़ुदा
ख़ुदा
कर
के
ज़िंदगी
तो
कभी
नहीं
आई
मौत
आई
ज़रा
ज़रा
करके
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Rajesh Reddy
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