roz ik khwaab-e-musalsal aur main | रोज़ इक ख़्वाब-ए-मुसलसल और मैं

  - Raeesuddin Raees
रोज़इकख़्वाब-ए-मुसलसलऔरमैं
रातभरयादोंकाजंगलऔरमैं
हाथकोईभीसहारेकोनहीं
पाँवकेनीचेहैदलदलऔरमैं
सोचताहूँशबगुज़ारूँअबकहाँ
घरकादरवाज़ामुक़फ़्फ़लऔरमैं
हरक़दमतारीकियाँहैंहम-रिकाब
अबकोईजुगनूमिशअलऔरमैं
हैहरइकपलख़ौफ़रक़्साँमौतका
चार-सूहैशोर-ए-मक़्तलऔरमैं
शे'रकहनाअब'रईस'आसाँनहीं
सामनेइकचेहरामोहमलऔरमैं
  - Raeesuddin Raees
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