जबसेदिलमेंतिरेबख़्शेहुएग़मठहरेहैं
महरमऔरभीअपनेलिएहमठहरेहैं
ग़मकिहरदौरमेंठहराएगएहासिल-ए-ज़ीस्त
औरइसदौरमेंहमसाहब-ए-ग़मठहरेहैं
हमतिरीराहमेंउट्ठेहैंबड़ेअज़्मकेसाथ
गर्दिश-ए-दहरभीठहरीहैजोहमठहरेहैं
शौक़-ए-आवारगी-ओ-ज़ौक़तलबकेक़ुर्बां
उठगएहैंतोकहाँअपनेक़दमठहरेहैं
मैंतसव्वुरसेकभीजिनकेलरज़उठताथा
वहीहालातमोहब्बतकाभरमठहरेहैं
मग़्फ़िरतहीसहीमय-ख़ाना-ओ-मयकेमा'नी
कियहाँआजसफ़ीरान-ए-हरमठहरेहैं
सिर्फ़आँखोंहीमेंकमरुकनसकेमेरी'रईस'
मेरेआँसूकिसीदामनमेंभीकमठहरेहैं