jigar ke KHoon se tazain-e-baal-o-par kar dii | जिगर के ख़ून से तज़ईन-ए-बाल-ओ-पर कर दी

  - Rabia Barni
जिगरकेख़ूनसेतज़ईन-ए-बाल-ओ-परकरदी
चमन-असीरनेयूँँज़िंदगीबसरकरदी
हिकायत-ए-ग़म-ए-दिलयूँँभीमुख़्तसरहीथी
तुम्हारेकहनेसेलोऔरमुख़्तसरकरदी
मिरीवफ़ाकीकहानीसेकौनवाक़िफ़था
तुम्हारेजौरनेतश्हीरदर-ब-दरकरदी
क़दमबढ़ाओकिमंज़िलक़रीबहैशायद
तभीतोराहहरीफ़ोंनेतंगतरकरदी
येकिसजहान-ए-तमन्नाकाफिरख़यालआया
किजिसख़यालनेहरशयअज़ीज़-तरकरदी
शबान-ए-ज़ुल्फ़कीबातेंतुलूअ'-ए-रुख़कीख़ैर
तमामउम्रइबादतमेंमुख़्तसरकरदी
नएहैंजाम-ओ-सुबूबादा-ओ-ख़ुमारनया
औरहमनेकोहना-शराबीमेंशबसहरकरदी
बहुतहीख़ूबथीरूदाद-ए-मौसम-ए-हस्ती
तिरीनिगाहकेसाएनेख़ूब-तरकरदी
मंज़िलोंकीख़बरहैरास्तोंकापता
मता-ए-क़ल्ब-ओ-नज़रनज़्र-ए-राहपरकरदी
नएशुऊ'रनएफ़लसफ़ेनईअक़दार
अय्यार-ए-इश्क़नेहरकाएनातसरकरदी
  - Rabia Barni
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