jab kabhi qaafila-e-abrar ravaan hota hai | जब कभी क़ाफ़िला-ए-अब्रर रवाँ होता है

  - Rabab Rashidi
जबकभीक़ाफ़िला-ए-अब्रररवाँहोताहै
शाख़-दर-शाख़इकएहसासजवाँहोताहै
बू-ए-गुलमौज-ए-सबासयेकहेहैदेखो
कौनअबहम-सफ़र-ए-उम्र-ए-रवाँहोताहै
येतसव्वुरजोसहाराहैमिरेजीनेका
येतसव्वुरभीकिसीवक़्तगराँहोताहै
दिनरहेचाहेपिघलनेलगेसूरजसेबदन
रातपरतोकिसीक़ातिलकागुमाँहोताहै
कितनेलम्हेहैंजोबे-चेहराचलेजातेहैं
सोचनेवालेकोएहसासकहाँहोताहै
कोईआँधीकिबुझादेयेचराग़ोंकीक़तार
ज़ेहनमेंजलतेहैंऔरघरमेंधुआँहोताहै
अबलहजेमेंवोगर्मीवोआँखोंमेंचमक
कोईऐसेमेंभलादुश्मन-ए-जाँहोताहै
  - Rabab Rashidi
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