gham ki tha hareef-e-jan ab hareef-e-jaanaan hai | ग़म कि था हरीफ़-ए-जाँ अब हरीफ़-ए-जानाँ है

  - Raaz Muradabadi
ग़मकिथाहरीफ़-ए-जाँअबहरीफ़-ए-जानाँहै
अबवोज़ुल्फ़-ए-बरहमहैअबवोचश्म-ए-गिर्यांहै
वुसअतोंमेंदामनकीइनदिनोंगरेबाँहै
हम-नफ़सकहींशायदमौसम-ए-बहाराँहै
रंग-ओ-बूकेपर्देमेंकौनयेख़िरामाँहै
हरनफ़समोअ'त्तरहैहरनज़रग़ज़ल-ख़्वाँहै
बंदगीयेक्याजानेदैरक्याहरमक्याहै
हमजहाँपेहैंवाइ'ज़कुफ़्रहैईमाँहै
शुक्रियामगरनासेहतूयेराज़क्यासमझे
जौर-ए-बरमलाउनकाइल्तिफ़ात-ए-पिन्हाँहै
  - Raaz Muradabadi
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