thii qahr-e-saadgi bhi sanwarne se peshtar | थी क़हर-ए-सादगी भी सँवरने से पेशतर

  - R P Shokh
थीक़हर-ए-सादगीभीसँवरनेसेपेशतर
शह-रगपेनेश्तरथाउतरनेसेपेशतर
फिरताहूँदर-ब-दरमैंमगरमिस्ल-ए-बू-ए-गुल
मेराभीथामक़ामबिखरनेसेपेशतर
बे-अश्कक्याहुआकिमैंबे-अक्सहोगया
आईनाथायेपानीउतरनेसेपेशतर
हिजरतसेपहलेहिज्रकेथेवसवसेमुझे
हरलम्हाहादिसाथागुज़रनेसेपेशतर
इसनज़-ए-इंतिज़ारकोइकउम्रहोचली
कैसीहमेश्गीहैयेमरनेसेपेशतर
  - R P Shokh
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