gham men doobi subh feeki shaam dekh | ग़म में डूबी सुब्ह फीकी शाम देख

  - Qamar Siwani
ग़ममेंडूबीसुब्हफीकीशामदेख
इल्तिफ़ात-ए-गर्दिश-ए-अय्यामदेख
ज़र्फ़ख़ुद्दारीशराफ़तख़ामुशी
इनकिताबोंमेंहमारानामदेख
मय-कदेमेंहैफ़ज़ा-ए-अश्क-ए-ग़म
लेरहाहैसिसकियाँहरजामदेख
शहरमेंगरजेतोबरसेदश्तमें
दौर-ए-नौकेबादलोंकाकामदेख
होगएवोमाइल-ए-लुत्फ़-ओ-करम
सब्रकेआग़ाज़काअंजामदेख
दानेकीजानिबबढ़मुर्ग़-ए-चमन
क़ैदकासामानज़ेर-ए-दामदेख
राह-ए-ग़ममेंमिलतीहैकैसीख़ुशी
साथमेरेचलकेइकदोगामदेख
लिखरहाहैहरवरक़परतेरानाम
'क़मर'अपनेक़लमकाकामदेख
  - Qamar Siwani
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