hamaari neend men koi saraab-e-khwaab bhi nahin | हमारी नींद में कोई सराब-ए-ख़्वाब भी नहीं

  - Qamar Siddiqi
हमारीनींदमेंकोईसराब-ए-ख़्वाबभीनहीं
येकैसारेगज़ारहैफ़रेब-ए-आबभीनहीं
थेकैसेकैसेलोगमेरेख़ेमा-ए-ख़यालमें
गएदिनोंकीख़ैरहोकिअबतनाबभीनहीं
येहादिसाकिबर्फ़-बारियोंकीज़दपेगए
मगरयेवाक़िआ'लहूमेंकोईताबभीनहीं
कुछगिलाइल्तिफ़ात-ए-हिज्रकीसियाहरात
फ़रामुशीकादौरहैकिअबअज़ाबभीनहीं
येलम्हालम्हाज़िंदगीकुछइसतरहसेकटगई
कहाँपेख़र्चक्याहुआकोईहिसाबभीनहीं
  - Qamar Siddiqi
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