lahu men tar ye dayaar bhi dekhna hai ik din | लहू में तर ये दयार भी देखना है इक दिन

  - Qamar Raza Shahzad
लहूमेंतरयेदयारभीदेखनाहैइकदिन
मुझेतिराइख़्तियारभीदेखनाहैइकदिन
गुज़रनाहैएकरास्तेसेहवाकीसूरत
चराग़कोसोगवारभीदेखनाहैइकदिन
तलाशकरनीहैअश्कऔरआईनेमेंनिस्बत
किसीकीआँखोंकेपारभीदेखनाहैइकदिन
अभीतोदुनियाकीसर्द-मेहरीसेलड़रहाहूँ
सुलूक-ए-परवरदिगारभीदेखनाहैइकदिन
नियामसेतेग़भीमुझेखींचनीहै'शहज़ाद'
औरअपनादिलतारतारभीदेखनाहैइकदिन
  - Qamar Raza Shahzad
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