mata-e-fikr nashaat-e-amal farogh-e-hayaat | मता-ए-फ़िक्र नशात-ए-अमल फ़रोग़-ए-हयात

  - Qamar Raees
मता-ए-फ़िक्रनशात-ए-अमलफ़रोग़-ए-हयात
तुम्हारादर्दतुम्हारीयेआख़िरीसौग़ात
हरीफ़साराज़मानारक़ीबसाराजहाँ
चुरालेकोईडरताहूँइसकारंग-ए-सबात
कहाँछुपाऊँउसेकिसतरहबचाऊँउसे
चराग़एकहवातेज़औरअँधेरीरात
फ़राग़जिस्मकादिलकासुकूँनज़रकाक़रार
तुम्हारेदर्दकेदुश्मनहैंयेसभीहालात
मैंउसमक़ामपेपहुँचाहूँइनदिनोंकिजहाँ
काहिश-ए-ग़म-ए-दौराँकाविश-ए-ग़म-ए-ज़ात
बसइकख़लिशकेसिवाएकआरज़ूकेसिवा
अजीबशहर-ए-ख़मोशाँहैशहर-ए-एहसासात
तुम्हीबताओकिऐसेमेंइकतुम्हारेसिवा
कहूँतोकिससेकहूँअबतुम्हारेदर्दकीबात
  - Qamar Raees
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy