मता-ए-फ़िक्रनशात-ए-अमलफ़रोग़-ए-हयात
तुम्हारादर्दतुम्हारीयेआख़िरीसौग़ात
हरीफ़साराज़मानारक़ीबसाराजहाँ
चुरानलेकोईडरताहूँइसकारंग-ए-सबात
कहाँछुपाऊँउसेकिसतरहबचाऊँउसे
चराग़एकहवातेज़औरअँधेरीरात
फ़राग़जिस्मकादिलकासुकूँनज़रकाक़रार
तुम्हारेदर्दकेदुश्मनहैंयेसभीहालात
मैंउसमक़ामपेपहुँचाहूँइनदिनोंकिजहाँ
नकाहिश-ए-ग़म-ए-दौराँनकाविश-ए-ग़म-ए-ज़ात
बसइकख़लिशकेसिवाएकआरज़ूकेसिवा
अजीबशहर-ए-ख़मोशाँहैशहर-ए-एहसासात
तुम्हीबताओकिऐसेमेंइकतुम्हारेसिवा
कहूँतोकिससेकहूँअबतुम्हारेदर्दकीबात