kya zindagi hai koi saza sochna pada | क्या ज़िंदगी है कोई सज़ा सोचना पड़ा

  - Qamar Gwaliari
क्याज़िंदगीहैकोईसज़ासोचनापड़ा
क्यूँमाँगतेहैंलोगदु'आसोचनापड़ा
तेराबदनयेतेरीजवानीतिराचलन
किसकिसकोलगरहीहैहवासोचनापड़ा
सबकेबदनलिबाससेबाहरनिकलआएँ
येडंककौनमारगयासोचनापड़ा
बे-कसग़रीबपरकिग़रीबीहटाओपर
सरमाया-दारकिसपेहँसासोचनापड़ा
क्यावोहैबेवक़ूफ़किजोबोलताहैसच
इसबातकोसमझनापड़ासोचनापड़ा
क़ातिलनेआजफेंकदीतलवारक्यूँ'क़मर'
काटाथाउसनेकिसकागलासोचनापड़ा
  - Qamar Gwaliari
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy