aaqil hai baa-shuoor hai kaafi zaheen bhi | आक़िल है बा-शुऊर है काफ़ी ज़हीन भी

  - Qamar Aasi
आक़िलहैबा-शुऊरहैकाफ़ीज़हीनभी
इसपरहैमुस्ताज़ादवोअज़-हदहसीनभी
बोसाकिसीभीफूलकाहमनेनहींलिया
रुख़्सारमुंतज़िररहेलबभीजबीनभी
घरलेलियाहैऐनतिरेघरकेसामने
औरइकख़रीदलायाहूँमैंदूरबीनभी
सबकामहोरहेहैंअजीबइसक़दरअजीब
लिखनेसेपहलेसोचतेहैंकातबीनभी
इकशोख़-ओ-शंगतिफ़्लछुपाहैदरून-ए-दिल
संजीदालगरहाहूँब-ज़ाहिरमतीनभी
आँखोंमेंजिसकीरहमहोहाथोंमेंरोटियाँ
वोशख़्समुफ़लिसोंकाधरमभीहैदीनभी
इंसानियतकेजिस्मपेचंदऐसेदाग़हैं
जिनपरहैशर्मसारफ़लकऔरज़मीनभी
हँसतेहुएमरेगाकोईदिलगज़ीदाशख़्स
आएगाइसड्रा
मेंकेअंदरवोसीनभी
अश'आरगरसफ़रकरेंदिलसेदिलतलक
देतेनहींहैंदाद'क़मर'सामईनभी
  - Qamar Aasi
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