main us ko takta rehta hooñ | मैं उस को तकता रहता हूँ

  - Qaisar Ziya Qaisar
मैंउसकोतकतारहताहूँ
जोफ़र्रुख़-ज़ादकीग़ज़लों
कीसूरतख़ूब-सूरतहै
किजिसकेफूलसेतनको
किसीरंगीनतितलीके
रसीलेमो'तबरहोंटों
केबोसोंकीज़रूरतहै
वोइकशहकारहैशायद
ख़ुदा-ए-पाककेफ़नका
किजिसकीसादगीमेंभी
हैरक़्साँहुस्नकाजादू
कमरसीनाहोगर्दनहो
किउसकेदस्तऔरबाज़ू
तराशेंसबकीऐसीहैं
किजैसेला'लकेचाक़ू
जबींपरमाहकाजल्वा
औरउसपरअब्रकेगेसू
सुलगतेगोरेगालोंपर
शफ़क़केग़ाज़ेकीख़ुश्बू
गुलाबोंसेफड़कतेलब
औरउसपरप्यासबे-क़ाबू
हैंनर्गिसकीतरहउसकी
चमकतीझीलसीआँखें
मगरबे-नूरहैंऐसी
किजैसेतंगग़ारोंकी
सियहपलकोंपेठहरेहों
अँधेरीरातकेआँसू
येमंज़ररूहपरमेरी
पिघलतेशीशोंकीसूरत
मुक़त्तरहोतारहताहै
किजिसकीसोज़िशोंमेंमैं
तड़पताचीख़तारहता
हूँसुब्ह-ओ-शामहरइकपल
किमेरीधड़कनोंसाँसों
कोचाहेमुंजमिदकरदो
मगरइसख़ूब-रूदुनिया
केतारीकआसमानोंको
मिरीआँखोंकेतारोंसे
जहाँतकहोसकेभरदो
येसुनकरक़स्रकेसारे
दर-ओ-दीवारपरतूफ़ाँ
साबरपाहोनेलगताहै
किनादानशहज़ादे
तूऐसाकरनहींसकता
जुनूँकीउजड़ीमांगोंमें
तूअफ़्शाँभरनहींसकता
तिरीधड़कनतिरीसाँसें
तिरीख़्वाबोंसेपुरआँखें
तिरेअज्दादकेसूरज
कीकिरनोंकीअमानतहैं
जोशाहीतख़्तपररौशन
चराग़ोंकीज़मानतहैं
  - Qaisar Ziya Qaisar
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