shahar ki rasm hai puraani vahii | शहर की रस्म है पुरानी वही

  - Qaisar Abbas
शहरकीरस्महैपुरानीवही
साज़िशेंताज़ाहैंकहानीवही
दर्दकेमौसमोंसेक्याउम्मीद
सबबलाएँहैंआसमानीवही
फिरसेखींचोहिफ़ाज़तोंकेहिसार
फिरहैदरियाओंकीरवानीवही
हमफ़क़ीरोंकेहौसलेदेखो
ज़ख़्मजितनेहोंसरगिरानीवही
सारेआसारहैंजुदाईके
सुरमईशामहैसुहानीवही
ख़ारबोएतोज़ख़्मपालेंगे
वक़्तदोहराएगाकहानीवही
यूँँतोसदियाँगुज़रगईं'क़ैसर'
दिलकेसद
मेंतिरीजवानीवही
  - Qaisar Abbas
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