hairaan hain saare aaiine maazi-o-haal ke | हैराँ हैं सारे आईने माज़ी-ओ-हाल के

  - Qadir Siddiqi
हैराँहैंसारेआईनेमाज़ी-ओ-हालके
जल्वेबिखरगएहैंयेकिसख़ुश-जमालके
उसबद-गुमाँकीहोंगीकमबद-गुमानियाँ
हमचाहेरखदेंअपनाकलेजानिकालके
दुनियासेबे-नियाज़हूँख़ुदसेभीबे-ख़बर
क्याक्याकरमहैंमुझपेग़म-ए-ला-ज़वालके
लिल्लाहदिलकीबातपेपर्दाडालिए
अस्बाबकुछतोहोंगेज़रूरइसमलालके
उनकीतलाशमेंमैंवहाँतकनिकलगया
कटतेहैंपरजिसऔजपेवहम-ओ-ख़यालके
  - Qadir Siddiqi
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