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Qadeer Asad
ham qadam mere chaltaa nahin
ham qadam mere chaltaa nahin | हम क़दम मेरे चलता नहीं
- Qadeer Asad
हम
क़दम
मेरे
चलता
नहीं
राह
भी
वो
बदलता
नहीं
- Qadeer Asad
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हर
क़दम
हर
साँस
गिरवी
ज़िंदगी
रहम-ओ-करम
इतने
एहसानों
पे
जीने
से
तो
मर
जाना
सही
Ajeetendra Aazi Tamaam
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वो
शांत
बैठा
है
कब
से
मैं
शोर
क्यूँँॅं
न
करूँॅं
बस
एक
बार
वो
कह
दे
कि
चुप
तो
चूँ
न
करूँॅं
Charagh Sharma
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शायद
किसी
बला
का
था
साया
दरख़्त
पर
चिड़ियों
ने
रात
शोर
मचाया
दरख़्त
पर
Abbas Tabish
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इस
से
पहले
कि
बिछड़
जाएँ
हम
दो
क़दम
और
मिरे
साथ
चलो
मुझ
सा
फिर
कोई
न
आएगा
यहाँ
रोक
लो
मुझको
अगर
रोक
सको
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Nasir Kazmi
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दे
रहे
हैं
लोग
मेरे
दिल
पे
दस्तक
बार
बार
दिल
मगर
ये
कह
रहा
है
सिर्फ़
तू
और
सिर्फ़
तू
Fareeha Naqvi
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हम
किसी
दर
पे
न
ठिटके
न
कहीं
दस्तक
दी
सैकड़ों
दर
थे
मिरी
जाँ
तिरे
दर
से
पहले
Ibn E Insha
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मंज़िल
पे
न
पहुँचे
उसे
रस्ता
नहीं
कहते
दो
चार
क़दम
चलने
को
चलना
नहीं
कहते
इक
हम
हैं
कि
ग़ैरों
को
भी
कह
देते
हैं
अपना
इक
तुम
हो
कि
अपनों
को
भी
अपना
नहीं
कहते
कम-हिम्मती
ख़तरा
है
समुंदर
के
सफ़र
में
तूफ़ान
को
हम
दोस्तो
ख़तरा
नहीं
कहते
बन
जाए
अगर
बात
तो
सब
कहते
हैं
क्या
क्या
और
बात
बिगड़
जाए
तो
क्या
क्या
नहीं
कहते
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Nawaz Deobandi
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कोई
शहर
था
जिसकी
एक
गली
मेरी
हर
आहट
पहचानती
थी
मेरे
नाम
का
इक
दरवाज़ा
था
इक
खिड़की
मुझको
जानती
थी
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Ali Zaryoun
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अब
तो
चुप-चाप
शाम
आती
है
पहले
चिड़ियों
के
शोर
होते
थे
Mohammad Alvi
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दिया
जला
के
सभी
बाम-ओ-दर
में
रखते
हैं
और
एक
हम
हैं
इसे
रह-गुज़र
में
रखते
हैं
समुंदरों
को
भी
मालूम
है
हमारा
मिज़ाज
कि
हम
तो
पहला
क़दम
ही
भँवर
में
रखते
हैं
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Abrar Kashif
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सभी
को
अपने
तरीक़े
से
हक़
है
जीने
का
कमाल
ये
है
बशर
हुक्म
पे
ख़ुदा
के
जिए
Qadeer Asad
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ज़रा
देखो
तो
सादा
लौही
मेरी
यक़ीं
तुम
पे
दुबारा
कर
रहा
हूँ
Qadeer Asad
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क्यूँँ
कर
इस
के
पीछे
भागें
हम
को
कहाँ
दरकार
है
दुनिया
Qadeer Asad
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कुछ
तो
नमक
भी
ज़ख़्म
पे
छिड़का
करेंगे
लोग
मेरे
मरज़
का
ऐसा
भी
चारा
करेंगे
लोग
Qadeer Asad
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हिक़ारत
से
मिला
एज़ाज़
हम
ठोकर
पे
रखते
हैं
मुहब्बत
से
कोई
दे
दे
तो
फिर
ख़ैरात
चलती
है
Qadeer Asad
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