haadse zeest ki tauqeer badha dete hain | हादसे ज़ीस्त की तौक़ीर बढ़ा देते हैं

  - Qabil Ajmeri
हादसेज़ीस्तकीतौक़ीरबढ़ादेतेहैं
ग़म-ए-यारतुझेहमतोदु'आदेतेहैं
तेरेइख़्लासकेअफ़्सूँतिरेवादोंकेतिलिस्म
टूटजातेहैंतोकुछऔरमज़ादेतेहैं
कू-ए-महबूबसेचुप-चापगुज़रनेवाले
अरसा-ए-ज़ीस्तमेंइकहश्रउठादेतेहैं
हाँयहीख़ाक-बसरसोख़्ता-सामाँदोस्त
तेरेक़दमोंमेंसितारोंकोझुकादेतेहैं
सीना-चाकान-ए-मोहब्बतकोख़बरहैकिनहीं
शहर-ए-ख़ूबाँकेदर-ओ-बामसदादेतेहैं
हमनेउसकेलबरुख़्सारकोछूकरदेखा
हौसलेआगकोगुलज़ारबनादेतेहैं
  - Qabil Ajmeri
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