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Parvez Shaikh
aaina jhooth kyuuñ nahin kahtaa
aaina jhooth kyuuñ nahin kahtaa | आइना झूठ क्यूँ नहीं कहता
- Parvez Shaikh
आइना
झूठ
क्यूँ
नहीं
कहता
टूटना
ही
अगर
मुक़द्दर
है
- Parvez Shaikh
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आइना
कब
बनाओगे
मुझ
को
मुझ
से
किस
दिन
मिलाओगे
मुझ
को
Zubair Ali Tabish
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आज
भी
शायद
कोई
फूलों
का
तोहफ़ा
भेज
दे
तितलियाँ
मंडला
रही
हैं
काँच
के
गुल-दान
पर
Shakeb Jalali
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आइना
देख
कर
तसल्ली
हुई
हम
को
इस
घर
में
जानता
है
कोई
Gulzar
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तुर्रा-ए-काकुल-ए-पेचां
रुख़-ए-नूरानी
पर
चश्मा-ए-आईना
में
साँप
सा
लहराता
है
Miyan Dad Khan Sayyah
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एक
आईना
रू-ब-रू
है
अभी
उस
की
ख़ुश्बू
से
गुफ़्तुगू
है
अभी
Ada Jafarey
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कल
चौदहवीं
की
रात
थी
शब
भर
रहा
चर्चा
तिरा
कुछ
ने
कहा
ये
चाँद
है
कुछ
ने
कहा
चेहरा
तिरा
Ibn E Insha
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अच्छे
हो
कर
लौट
गए
सब
घर
लेकिन
मौत
का
चेहरा
याद
रहा
बीमारों
को
Shariq Kaifi
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कुछ
ने
आँखें
कुछ
ने
चेहरा
देखा
है
सब
ने
तुझ
को
थोड़ा
थोड़ा
देखा
है
Tousief Tabish
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तुम
तो
सर्दी
की
हसीं
धूप
का
चेहरा
हो
जिसे
देखते
रहते
हैं
दीवार
से
जाते
हुए
हम
Nomaan Shauque
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आइना
क्यूँँ
ख़रीद
कर
रक्खें
जब
सँवरने
का
दिल
नहीं
करता
इश्क़
ही
था
जो
दिल
से
करते
थे
वो
भी
करने
का
दिल
नहीं
करता
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Mohit Dixit
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मदीने
की
गलियों
का
चक्कर
लगा
लूँ
मिले
आप
की
गर
शफ़ा'अत
कभी
भी
Parvez Shaikh
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ये
मत
सोचना
अब
मुहब्बत
नहीं
है
उसे
बस
बताने
की
हिम्मत
नहीं
है
वफ़ा
माँगता
क्यूँ
फिरुँ
हर
किसी
से
मिरे
दिल
में
इतनी
भी
ग़ुर्बत
नहीं
है
तिरे
मन
में
जब
आए
तब
काम
करना
मुझे
अब
किसी
की
ज़रूरत
नहीं
है
मिरे
यार
कहते
हैं
'परवेज़'
मुझ
को
मुझे
माल-ओ-ज़र
की
ज़रूरत
नहीं
है
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Parvez Shaikh
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वो
कोई
और
हैं
उधर
ढूंढो
जी
हुज़ूरी
हमें
नहीं
आती
Parvez Shaikh
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देखना
है
मेरी
वफ़ा
का
रंग
देख
ले
हाथ
पर
हिना
का
रंग
ये
तकब्बुर
ये
नाज़
नख़रों
से
तेरे
चेहरे
पे
हैं
अना
का
रंग
साँवला
चेहरा
नील-गूँ
आँखें
और
उस
पर
तेरी
अदा
का
रंग
नाज़
करती
हैं
जिस
पे
हूर-ओ-मलक
तुझ
पे
उतरा
है
वो
हया
का
रंग
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Parvez Shaikh
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तंज़
जो
मुझ
पे
कर
रहा
है
तू
अभी
दाद
देगा
ज़रूर
शे'र
पे
मिरे
Parvez Shaikh
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