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Praveen Bhardwaj
ishq ka saawan banaa lo
ishq ka saawan banaa lo | इश्क़ का सावन बना लो
- Praveen Bhardwaj
इश्क़
का
सावन
बना
लो
उम्र
का
बचपन
बना
लो
कान
की
बाली
नहीं
तो
हाथ
का
कंगन
बना
लो
या
लगा
लो
दिल
मुझी
से
या
मुझे
धड़कन
बना
लो
दिल
अगर
घर
आपका
है
तो
मुझे
आँगन
बना
लो
तुम
बनो
राधा
कभी
तो
मुझको
भी
मोहन
बना
लो
चाँद
की
तुम
रौशनी
हो
रात
को
रौशन
बना
लो
जिस्म
का
हिस्सा
नहीं
दो
दिल
का
बस
दामन
बना
लो
- Praveen Bhardwaj
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इसी
कारण
से
मैं
उसका
बदन
छूता
नहीं
यारों
मुझे
मालूम
है
क़िस्मत
में
वो
लिक्खा
नहीं
यारों
Harsh saxena
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हुस्न
को
भी
कहाँ
नसीब
'जिगर'
वो
जो
इक
शय
मिरी
निगाह
में
है
Jigar Moradabadi
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बदन
का
सारा
लहू
खिंच
के
आ
गया
रुख़
पर
वो
एक
बोसा
हमें
दे
के
सुर्ख़-रू
है
बहुत
Zafar Iqbal
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दो
आँखें
हैं
दो
पलकें
हैं
जबीं
है
चूमने
ख़ातिर
बहुत
से
ज़ाविए
हैं
उस
बदन
में
देखने
लायक
Siddharth Saaz
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हम
उस
में
बैठ
के
करते
हैं
साधना
तेरी
हमारा
जिस्म
भी
भीतर
से
एक
शिवाला
है
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Irshad Khan Sikandar
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इसीलिए
तो
हिफ़ाज़त
में
बैठा
रहता
हूँ
मेरे
बदन
में
कोई
नीम
जान
रहता
है
Nirmal Nadeem
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हमारे
बाद
तेरे
इश्क़
में
नए
लड़के
बदन
तो
चू
मेंगे
ज़ुल्फ़ें
नहीं
सँवारेंगे
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Vikram Gaur Vairagi
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हवा
चली
तो
उसकी
शॉल
मेरी
छत
पे
आ
गिरी
ये
उस
बदन
के
साथ
मेरा
पहला
राब्ता
हुआ
Zia Mazkoor
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उस
के
फ़रोग़-ए-हुस्न
से
झमके
है
सब
में
नूर
शम-ए-हरम
हो
या
हो
दिया
सोमनात
का
Meer Taqi Meer
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तुमने
कैसे
उसके
जिस्म
की
ख़ुशबू
से
इनकार
किया
उस
पर
पानी
फेंक
के
देखो
कच्ची
मिट्टी
जैसा
है
Tehzeeb Hafi
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एक
रोज़
सभी
को
मर
जाना
है
जानाँ
उस
सेे
पहले
मुझे
घर
जाना
है
जानाँ
तुझे
करनी
है
मुहब्बत
तो
आज
कर
वक़्त
हाथो
से
बिखर
जाना
हैं
जानाँ
मेरे
खौफ़
की
शाम
ख़त्म
होने
को
है
इसके
बाद
तुझे
डर
जाना
हैं
जानाँ
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Praveen Bhardwaj
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इस
बात
से
मुझे
कोई
नाराज़गी
नहीं
है
वो
जो
तेरी
ख़ुदगर्ज़ी
थी
मेरी
दोस्ती
थी
Praveen Bhardwaj
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बातें
ग़लत-सही
की
करता
भी
कौन
है
गूँगे
जो
थे
सो
हैं
और
बाक़ी
भी
मौन
हैं
Praveen Bhardwaj
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मेरी
जाँ
कोई
ज़ुल्म
न
कर
ख़ुदा
के
लिए
यहाँ
कोई
ग़ुरूर
नहीं
रहता
सदा
के
लिए
Praveen Bhardwaj
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इक
तू
था
तो
थे
मेरे
भी
साहिल
इक
तू
नइँ
तो
अब
दरिया
भी
नइँ
हूँ
Praveen Bhardwaj
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