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Praveen Bhardwaj
har aag se raushni nahin hoti
har aag se raushni nahin hoti | हर आग से रौशनी नहीं होती
- Praveen Bhardwaj
हर
आग
से
रौशनी
नहीं
होती
दिल
जले
तो
अँधेरा
होता
हैं
कोई
क्यूँ
पानी
का
रास्ता
रोके
पानी
रुके
तो
दरिया
होता
हैं
कोई
अपना
बिछड़े
तो
आप
जाने
की
दर्द
कितना
गहरा
होता
हैं
कोई
हम
सेे
पूछे
ज़िन्दगी
क्या
हैं
या
मर
जाने
से
क्या
होता
हैं
- Praveen Bhardwaj
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हम
भी
दरिया
हैं
हमें
अपना
हुनर
मालूम
है
जिस
तरफ़
भी
चल
पड़ेंगे
रास्ता
हो
जाएगा
Bashir Badr
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अगर
फ़ुर्सत
मिले
पानी
की
तहरीरों
को
पढ़
लेना
हर
इक
दरिया
हज़ारों
साल
का
अफ़्साना
लिखता
है
Bashir Badr
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इक
और
दरिया
का
सामना
था
'मुनीर'
मुझ
को
मैं
एक
दरिया
के
पार
उतरा
तो
मैंने
देखा
Muneer Niyazi
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मत
पूछो
कितना
ग़मगीं
हूँ
गंगा
जी
और
जमुना
जी
ज़्यादा
तुमको
याद
नहीं
हूँ
गंगा
जी
और
जमुना
जी
अमरोहे
में
बान
नदी
के
पास
जो
लड़का
रहता
था
अब
वो
कहाँ
है
मैं
तो
वहीं
हूँ
गंगा
जी
और
जमुना
जी
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Jaun Elia
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इशरत-ए-क़तरा
है
दरिया
में
फ़ना
हो
जाना
दर्द
का
हद
से
गुज़रना
है
दवा
हो
जाना
Mirza Ghalib
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ये
इश्क़
नहीं
आसाँ
इतना
ही
समझ
लीजे
इक
आग
का
दरिया
है
और
डूब
के
जाना
है
Jigar Moradabadi
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नदी
आँखें
भँवर
ज़ुल्फ़ें
कहाँ
तैरूँ
कहाँ
डूबूँ
कि
तेरे
शहर
में
सब
की
अदाएँ
एक
जैसी
हैं
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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तुम
ने
किया
है
तुम
ने
इशारा
बहुत
ग़लत
दरिया
बहुत
दुरुस्त
किनारा
बहुत
ग़लत
Nabeel Ahmed Nabeel
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मैं
एक
ठहरा
हुआ
पुल,
तू
बहता
दरिया
है
तुझे
मिलूँगा
तो
फिर
टूट
कर
मिलूँगा
मैं
Subhan Asad
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आँख
आँसू
को
ऐसे
रस्ता
देती
है
जैसे
रेत
गुज़रने
दरिया
देती
है
कोई
भी
उसको
जीत
नहीं
पाया
अब
तक
वैसे
वो
हर
एक
को
मौक़ा
देती
है
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Kafeel Rana
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कोई
कब
समझता
है
कितनी
दूर
है
मंज़िल
कितना
दूर
हम
सेे
हम
कितना
दूर
दिल
से
दिल
Praveen Bhardwaj
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कभी
तो
हम
दरख़्तों
से
भी
पूछो
क्या
हमें
ग़म
है
नहीं
है
डाल
पर
इक
फल
नहीं
हैं
घोंसला
कोई
Praveen Bhardwaj
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कुछ
न
कुछ
हो
जाता
हैं
सबका
यहाँ
आख़िर
में
इस
बात
पे
क्या
मरना
तेरे
बाद
में
मेरा
क्या
होगा
Praveen Bhardwaj
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लोग
मरने
लगे
हैं
अब
हवा
के
लिए
इतनी
जद्दोजहद
एक
दवा
के
लिए
हमें
वक़्त
रहते
ये
जान
लेना
हैं
की
कोई
खर्च
नहीं
लगता
दु'आ
के
लिए
हम
सेे
भी
पूछिये
हमारा
हाल-चाल
और
अपना
भी
ख़याल
रखें
ख़ुदा
के
लिए
अकेलापन
भी
मार
सकता
हैं
इस
वक़्त
किसी
को
छोड़
मत
देना
कज़ा
के
लिए
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Praveen Bhardwaj
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तलवार
आदमी
की
है
ये
हाथ
आदमी
के
हैं
क्यूँ
कट
रहे
हैं
आदमी
हैवानियत
तो
देखिए
Praveen Bhardwaj
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