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Piyush Nishchal
sharaabi hooñ magar khayal rehta hai mujhe ki haan
sharaabi hooñ magar khayal rehta hai mujhe ki haan | शराबी हूँ मगर ख़याल रहता है मुझे कि हाँ
- Piyush Nishchal
शराबी
हूँ
मगर
ख़याल
रहता
है
मुझे
कि
हाँ
शराब
के
नशे
में
भी
तुम्हें
हसीन
कहना
है
- Piyush Nishchal
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ये
कैसा
नश्शा
है
मैं
किस
अजब
ख़ुमार
में
हूँ
तू
आ
के
जा
भी
चुका
है
मैं
इंतिज़ार
में
हूँ
Muneer Niyazi
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वो
नशा
है
के
ज़बाँ
अक़्ल
से
करती
है
फ़रेब
तू
मिरी
बात
के
मफ़्हूम
पे
जाता
है
कहाँ
Pallav Mishra
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वो
गुल-फ़रोश
कहाँ
अब
गुलाब
किस
से
लूँ
नहीं
रहा
मिरा
साक़ी
शराब
किस
से
लूँ
Anwar Shaoor
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तुम्हारी
आँखों
की
तौहीन
है
ज़रा
सोचो
तुम्हारा
चाहने
वाला
शराब
पीता
है
Munawwar Rana
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फ़ुर्सत
नहीं
मुझे
कि
करूँँ
इश्क़
फिर
से
अब
माज़ी
की
चोटों
से
अभी
उभरा
नहीं
हूँ
मैं
डर
है
कहीं
ये
ऐब
उसे
रुस्वा
कर
न
दे
सो
ग़म
में
भी
शराब
को
छूता
नहीं
हूँ
मैं
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Harsh saxena
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मेरी
जवानी
को
कमज़ोर
क्यूँ
समझते
हो
तुम्हारे
वास्ते
अब
भी
शबाब
बाक़ी
है
ये
और
बात
है
बोतल
ये
गिर
के
टूट
गई
मगर
अभी
भी
ज़रा
सी
शराब
बाक़ी
है
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Paplu Lucknawi
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आए
कुछ
अब्र
कुछ
शराब
आए
इस
के
बाद
आए
जो
अज़ाब
आए
Faiz Ahmad Faiz
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सब
को
मारा
'जिगर'
के
शे'रों
ने
और
'जिगर'
को
शराब
ने
मारा
Jigar Moradabadi
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वो
गर
शराब
है
तो
समझो
कि
मैं
नशा
हूँ
कुछ
इस
तरह
से
भीतर
उस
शख़्स
के
बसा
हूँ
Harsh saxena
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ऐ
शैख़
तू
शराब
के
पीछे
न
पड़
कभी
ये
ख़ुद
को
वाहियात
बनाने
की
चीज़
है
Shivsagar Sahar
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सिखाया
था
जिसे
मैंने
मुहब्बत
में
वफ़ा
करना
वो
लड़की
इश्क़
में
अब
ख़ुद
को
फ़रज़ाना
समझती
है
Piyush Nishchal
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ख़ुदास
भी
नहीं
रिश्ता
हमारा
न
जाने
कौन
है
अपना
हमारा
अ'अज़
हो
जाते
हम
सबके
लिए
पर
किसी
से
जी
नहीं
मिलता
हमारा
किताबें
बोझ
बनती
जा
रही
है
बिखरता
जा
रहा
सपना
हमारा
अभी
मिलने
को
दो
दिन
ही
हुए
थे
कि
ग़ुस्सा
खा
गया
रिश्ता
हमारा
लिपट
कर
रोता
हूँ
दरवाज़े
से
तो
सिसक
कर
रोता
है
परदा
हमारा
तुम्हारी
साड़ियों
से
ही
भरेगा
पड़ा
है
ख़ाली
जो
बक्सा
हमारा
कभी
तो
हम
भी
तुम
सेे
ये
कहेंगे
बहुत
प्यारा
हुआ
बेटा
हमारा
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Piyush Nishchal
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नदी
दरख़्त
चाँद
ये
सितारे
सब
जहाँ
में
हैं
मगर
मुझे
तुम्हारा
चेहरा
देखना
सुकूँ
दिया
Piyush Nishchal
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मिरे
शब्दों
को
पढ़के
ये
समझ
लो
तुम
किसी
के
सुर्ख़
होंठो
की
कहानी
है
Piyush Nishchal
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हम
हिज्र
में
भी
ख़ुश
हैं
पर
दीवार-ओ-दर
में
रहते
हैं
हम
शहरयार-ए-ग़म
ख़ुदा
की
हर
नज़र
में
रहते
हैं
हम
लोग
अब
इक-दूसरे
से
मुख़्तलिफ़
होकर
हैं
ख़ुश
वो
अपने
घर
में
रहती
है
हम
अपने
घर
में
रहते
हैं
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Piyush Nishchal
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