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Piyush Nishchal
mire shabdon ko padhke ye samajh lo tum
mire shabdon ko padhke ye samajh lo tum | मिरे शब्दों को पढ़के ये समझ लो तुम
- Piyush Nishchal
मिरे
शब्दों
को
पढ़के
ये
समझ
लो
तुम
किसी
के
सुर्ख़
होंठो
की
कहानी
है
- Piyush Nishchal
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उनकी
सोहबत
में
गए
सँभले
दोबारा
टूटे
हम
किसी
शख़्स
को
दे
दे
के
सहारा
टूटे
ये
अजब
रस्म
है
बिल्कुल
न
समझ
आई
हमें
प्यार
भी
हम
ही
करें
दिल
भी
हमारा
टूटे
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Vikram Gaur Vairagi
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रोज़
मिलने
पे
भी
लगता
था
कि
जुग
बीत
गए
इश्क़
में
वक़्त
का
एहसास
नहीं
रहता
है
Ahmad Mushtaq
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रफ़्ता
रफ़्ता
सब
कुछ
समझ
गया
हूँ
मैं
लोग
अचानक
टैरेस
से
क्यूँ
कूद
गए
Shadab Asghar
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किताब-ए-इश्क़
में
हर
आह
एक
आयत
है
पर
आँसुओं
को
हुरूफ़-ए-मुक़त्तिआ'त
समझ
Umair Najmi
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नज़दीकी
अक्सर
दूरी
का
कारन
भी
बन
जाती
है
सोच-समझ
कर
घुलना-मिलना
अपने
रिश्ते-दारों
में
Aalok Shrivastav
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अपनी
हालत
का
ख़ुद
एहसास
नहीं
है
मुझ
को
मैं
ने
औरों
से
सुना
है
कि
परेशान
हूँ
मैं
Aasi Uldani
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जो
तस्वीरें
साथ
में
खींची
जाती
हैं
वो
इक
दिन
तन्हा
महसूस
कराती
हैं
Vikram Gaur Vairagi
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ज़ोर
चलता
है
औरत
पे
सो
मर्द
ख़ुश
बीवी
पे
ख़त्म
मर्दानगी
की
समझ
Neeraj Neer
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ऐसे
असमंजस
में
मत
डालो
मुझे
तुम
मेरी
जान
ठीक
से
सोचो
समझ
लो
इश्क़
सा
है
इश्क़
है
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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तेरे
एहसास
को
ख़ुशबू
बनाते
जो
बस
चलता
तुझे
उर्दू
बनाते
यक़ीनन
इस
से
तो
बेहतर
ही
होती
वो
इक
दुनिया
जो
मैं
और
तू
बनाते
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Saurabh Sharma 'sadaf'
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बदन
से
ख़ून
है
बहता
हमारा
सड़क
पर
गिर
रहा
हिस्सा
हमारा
तलाशी
में
गए
थे
इश्क़
की
हम
लिखा
ही
था
वहीं
मरना
हमारा
भरा
रहता
था
दाइम
चाँद
से
पर
पड़ा
है
ख़ाली
अब
हुजरा
हमारा
किसी
के
मरने
पे
भी
दुख
नहीं
है
न
जाने
क्या
ही
अब
होगा
हमारा
मिरे
मरने
पे
अपने
भी
न
आए
अमीरी
खा
गई
रिश्ता
हमारा
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Piyush Nishchal
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साहिब-ए-मसनद
ज़रा
आवाम
की
भी
फ़िक्र
कर
लो
जान
ले
लेगी
किसी
दिन
ये
तुम्हारी
हाकिमिय्यत
Piyush Nishchal
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ख़ुदास
भी
नहीं
रिश्ता
हमारा
न
जाने
कौन
है
अपना
हमारा
अ'अज़
हो
जाते
हम
सबके
लिए
पर
किसी
से
जी
नहीं
मिलता
हमारा
किताबें
बोझ
बनती
जा
रही
है
बिखरता
जा
रहा
सपना
हमारा
अभी
मिलने
को
दो
दिन
ही
हुए
थे
कि
ग़ुस्सा
खा
गया
रिश्ता
हमारा
लिपट
कर
रोता
हूँ
दरवाज़े
से
तो
सिसक
कर
रोता
है
परदा
हमारा
तुम्हारी
साड़ियों
से
ही
भरेगा
पड़ा
है
ख़ाली
जो
बक्सा
हमारा
कभी
तो
हम
भी
तुम
सेे
ये
कहेंगे
बहुत
प्यारा
हुआ
बेटा
हमारा
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Piyush Nishchal
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मुझको
अंदर
से
खाता
है
हिज्र
किसी
का
वर्ना
शब
को
अच्छा-ख़ासा
सोता
था
मैं
Piyush Nishchal
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ख़ुश
रहे
ता-उम्र
तू
अपनी
निशात-ए-ज़िंदगी
में
तेरे
पथ
ने
ओढ़ी
है
झड़ते
हुए
फूलों
की
चादर
Piyush Nishchal
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