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Piyush Nishchal
KHush rahe ta-umr tu apni nishaat-e-zindagi men
KHush rahe ta-umr tu apni nishaat-e-zindagi men | ख़ुश रहे ता-उम्र तू अपनी निशात-ए-ज़िंदगी में
- Piyush Nishchal
ख़ुश
रहे
ता-उम्र
तू
अपनी
निशात-ए-ज़िंदगी
में
तेरे
पथ
ने
ओढ़ी
है
झड़ते
हुए
फूलों
की
चादर
- Piyush Nishchal
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फूल
से
लेकर
ये
धनिया
लाने
तक
के
इस
सफ़र
को
मुझको
तेरे
साथ
ही
तय
करने
की
ख़्वाहिश
है
पगली
Harsh saxena
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फोन
भी
आया
तो
शिकवे
के
लिए
फूल
भी
भेजा
तो
मुरझाया
हुआ
Balmohan Pandey
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इक
गुल
के
मुरझाने
पर
क्या
गुलशन
में
कोहराम
मचा
इक
चेहरा
कुम्हला
जाने
से
कितने
दिल
नाशाद
हुए
Faiz Ahmad Faiz
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लब
हैं
जैसे
गुल
सुमबुल
रंग-ए-याक़ूती
ख़ुद
को
मैख़ाना
तितली
का
बना
रखा
है
ALI ZUHRI
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मिरे
ही
वास्ते
लाया
है
दोनो
फूल
और
ख़ंजर
मुझे
ये
देखना
है
बस
वो
पहले
क्या
उठाता
है
Parul Singh "Noor"
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दूर
इक
सितारा
है
और
वो
हमारा
है
आँख
तक
नहीं
लगती
कोई
इतना
प्यारा
है
छू
के
देखना
उसको
क्या
अजब
नज़ारा
है
तीर
आते
रहते
थे
फूल
किसने
मारा
है
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Kafeel Rana
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काँटे
बनकर
वापस
क्यूँँ
आ
जाते
हैं?
हमने
तुमको
फूल
जो
भेजे
होते
हैं
Riyaz Tariq
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मदमस्त
महकते
फूलों
को
इन
कलियों
को
चूमा
जाए
इक
ख़्वाहिश
मेरी
यह
भी
है
तेरी
गलियों
में
घूमा
जाए
Akash Rajpoot
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तसव्वुर
तजरबा
तेवर
तमन्ना
और
तन्हाई
मिलेंगे
फूल
सब
इस
में
ग़ज़ल
गुलदान
है
यारों
पढ़ाई
नौकरी
शादी
फिर
उसके
बाद
दो
बच्चे
हमारी
ज़िन्दगी
इतनी
कहाँ
आसान
है
यारों
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Tanoj Dadhich
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मैं
बाग़
में
जिस
जगह
खड़ा
हूँ
हर
फूल
से
काम
चल
रहा
है
Shaheen Abbas
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जो
कभी
काम
आए
न
इमदाद
को
मुफ़्लिसी
की
उन्हें
बस
दुआएँ
लगें
Piyush Nishchal
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आजकल
पढ़ने
लगा
हूँ
जौन
को
मैं
या'नी
दुनिया
से
मुझे
मतलब
नहीं
अब
Piyush Nishchal
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ख़ुदास
भी
नहीं
रिश्ता
हमारा
न
जाने
कौन
है
अपना
हमारा
अ'अज़
हो
जाते
हम
सबके
लिए
पर
किसी
से
जी
नहीं
मिलता
हमारा
किताबें
बोझ
बनती
जा
रही
है
बिखरता
जा
रहा
सपना
हमारा
अभी
मिलने
को
दो
दिन
ही
हुए
थे
कि
ग़ुस्सा
खा
गया
रिश्ता
हमारा
लिपट
कर
रोता
हूँ
दरवाज़े
से
तो
सिसक
कर
रोता
है
परदा
हमारा
तुम्हारी
साड़ियों
से
ही
भरेगा
पड़ा
है
ख़ाली
जो
बक्सा
हमारा
कभी
तो
हम
भी
तुम
सेे
ये
कहेंगे
बहुत
प्यारा
हुआ
बेटा
हमारा
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Piyush Nishchal
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मैं
जो
तुम्हारी
हर
अज़िय्यत
सह
के
अब
तक
ज़िंदा
हूँ
जिस
दिन
गले
से
तुम
लगाओगी
मैं
मर
ही
जाउँगा
Piyush Nishchal
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बचपन
जवानी
फिर
मुहब्बत
से
गुज़र
कर
इस
घड़ी
ऐ
क़ब्र
आँखें
खोल
आए
हैं
तिरे
दहलीज़
पे
Piyush Nishchal
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