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Piyush Nishchal
jaanta hooñ ki barbaad hooñ main so ab
jaanta hooñ ki barbaad hooñ main so ab | जानता हूँ कि बर्बाद हूँ मैं सो अब
- Piyush Nishchal
जानता
हूँ
कि
बर्बाद
हूँ
मैं
सो
अब
तू
मिरा
ग़म
मना
ले
नसीहत
न
दे
- Piyush Nishchal
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ज़िंदगी
है
या
कोई
तूफ़ान
है
हम
तो
इस
जीने
के
हाथों
मर
चले
Khwaja Meer Dard
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पैग़ाम-ए-हयात-ए-जावेदाँ
था
हर
नग़्मा-ए-कृष्ण
बाँसुरी
का
Hasrat Mohani
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गुज़रता
ही
नहीं
वो
एक
लम्हा
इधर
मैं
हूँ
कि
बीता
जा
रहा
हूँ
Madan Mohan Danish
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इक
रोज़
इक
नदी
के
किनारे
मिलेंगे
हम
इक
दूसरे
से
अपना
पता
पूछते
हुए
Shahbaz Rizvi
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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तुम
भी
लिखना
तुम
ने
उस
शब
कितनी
बार
पिया
पानी
तुम
ने
भी
तो
छज्जे
ऊपर
देखा
होगा
पूरा
चाँद
Nida Fazli
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सर-ज़मीन-ए-हिंद
पर
अक़्वाम-ए-आलम
के
'फ़िराक़'
क़ाफ़िले
बसते
गए
हिन्दोस्ताँ
बनता
गया
Firaq Gorakhpuri
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मैं
तो
मुद्दत
से
ग़ैर-हाज़िर
हूँ
बस
मेरा
नाम
है
रजिस्टर
में
याद
करती
हैं
तुझको
दीवारें
शक्ल
उभर
आई
है
पलस्तर
में
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Azhar Nawaz
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इस
का
अपनी
ही
रवानी
पर
नहीं
है
इख़्तियार
ज़िंदगी
शिव
की
जटाओं
में
है
गंगा
की
तरह
Ayush Charagh
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बातें
करो
तो
बोलती
है
बोलते
हो
तुम
बहुत
उसने
किनारे
पे
से
लहरें
देखी
गहराई
नहीं
100rav
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तुम्हारे
होंठ
पर
इक
तिल
को
देखा
तो
लगा
मुझको
कि
इसको
पढ़के
तेरे
इश्क़
में
नायाब
हो
जाऊँ
Piyush Nishchal
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मुहब्बत
हम
भी
कर
तो
लें
मगर
डर
है
कलेजा
ही
न
कोई
काट
ले
मेरा
Piyush Nishchal
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होंठ
को
दाँत
से
तू
दबाया
न
कर
फूल
पे
कौन
रखता
है
ख़ंजर
भला
Piyush Nishchal
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यक़ीं
मानो
कि
वो
अब
भी
मुहब्बत
करती
है
मुझ
सेे
यक़ीं
ये
भी
करो
यारा
कि
मैं
अब
झूठ
कहता
हूँ
Piyush Nishchal
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ख़ुदास
भी
नहीं
रिश्ता
हमारा
न
जाने
कौन
है
अपना
हमारा
अ'अज़
हो
जाते
हम
सबके
लिए
पर
किसी
से
जी
नहीं
मिलता
हमारा
किताबें
बोझ
बनती
जा
रही
है
बिखरता
जा
रहा
सपना
हमारा
अभी
मिलने
को
दो
दिन
ही
हुए
थे
कि
ग़ुस्सा
खा
गया
रिश्ता
हमारा
लिपट
कर
रोता
हूँ
दरवाज़े
से
तो
सिसक
कर
रोता
है
परदा
हमारा
तुम्हारी
साड़ियों
से
ही
भरेगा
पड़ा
है
ख़ाली
जो
बक्सा
हमारा
कभी
तो
हम
भी
तुम
सेे
ये
कहेंगे
बहुत
प्यारा
हुआ
बेटा
हमारा
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Piyush Nishchal
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