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Piyush Nishchal
hamaare mulk ki ye dastaan hai
hamaare mulk ki ye dastaan hai | हमारे मुल्क की ये दास्ताँ है
- Piyush Nishchal
हमारे
मुल्क
की
ये
दास्ताँ
है
सियासत
अब
लहू
पीने
लगी
है
- Piyush Nishchal
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मुल्क
तो
मुल्क
घरों
पर
भी
है
क़ब्ज़ा
उस
का
अब
तो
घर
भी
नहीं
चलते
हैं
सियासत
के
बग़ैर
Zia Zameer
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भले
ही
प्यार
हो
या
हिज्र
हो
या
फिर
सियासत
हो
कुछ
ऐसे
दोस्त
थे
हर
बात
पर
अश'आर
कहते
थे
Siddharth Saaz
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इन
से
उम्मीद
न
रख
हैं
ये
सियासत
वाले
ये
किसी
से
भी
मोहब्बत
नहीं
करने
वाले
Nadim Nadeem
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सजा
दूँ
मांँग
मैं
तेरी
लहू
से
आज
मैं
अपने
बुरा
मानो
अगर
मेरे
न
तुम
सरकार,
होली
में
Shashank Shekhar Pathak
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ऐसा
नहीं
बस
आज
तुझे
प्यार
करेंगे
ता'उम्र
यही
काम
लगातार
करेंगे
सरकार
करेगी
नहीं
इस
देश
का
उद्धार
उद्धार
करेंगे
तो
कलाकार
करेंगे
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Tanoj Dadhich
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बख़्शी
हैं
हम
को
इश्क़
ने
वो
जुरअतें
'मजाज़'
डरते
नहीं
सियासत-ए-अहल-ए-जहाँ
से
हम
Asrar Ul Haq Majaz
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दो
मुल्कों
के
सियासी
खेल
में
जाने
यहाँ
पर
कितनों
के
घर
उजड़े
हैं
मौला
वही
हर
सुब्ह
मंज़र
देखना
पड़ता
हज़ारों
लोग
यूँँ
ही
मरते
हैं
मौला
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Harsh saxena
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सरकार
कहने
लग
गया
वो
सीधे
नाम
से
जो
हम-क़लाम
कम
था
मेरे
पहले
नाम
से
मुझ
सेे
बिछड़
के
अपना
कोई
नाम
रख
लियो
सब
लोग
जानते
हैं
तुझे
मेरे
नाम
से
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Rishabh Sharma
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वो
हिंदू,
मैं
मुस्लिम,
ये
सिक्ख,
वो
ईसाई
यार
ये
सब
सियासत
है
चलो
इश्क़
करें
Rahat Indori
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सियासत
के
चेहरे
पे
रौनक़
नहीं
ये
औरत
हमेशा
की
बीमार
है
Shakeel Jamali
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मुझको
अंदर
से
खाता
है
हिज्र
किसी
का
वर्ना
शब
को
अच्छा-ख़ासा
सोता
था
मैं
Piyush Nishchal
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तुम्हारे
होंठ
पर
इक
तिल
को
देखा
तो
लगा
मुझको
कि
इसको
पढ़के
तेरे
इश्क़
में
नायाब
हो
जाऊँ
Piyush Nishchal
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तिरे
होंठ
पर
एक
नन्हा
सा
तिल
वो
जिसे
देख
शे'र-ओ-सुख़न
याद
आया
Piyush Nishchal
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नदी
दरख़्त
चाँद
ये
सितारे
सब
जहाँ
में
हैं
मगर
मुझे
तुम्हारा
चेहरा
देखना
सुकूँ
दिया
Piyush Nishchal
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फूल
से
जब-जब
भी
बातें
होती
है
मेरा
चेहरा
तब
शगुफ़्ता
होता
है
इश्क़
के
मैदान
में
सब
मिलते
हैं
और
सबके
साथ
धोखा
होता
है
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Piyush Nishchal
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