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AMIT SINGH "parwana"
ik dariyaa ke dono saahil ham dono
ik dariyaa ke dono saahil ham dono | इक दरिया के दोनों साहिल हम दोनों
- AMIT SINGH "parwana"
इक
दरिया
के
दोनों
साहिल
हम
दोनों
देखें
हमको
कौन
मिलाने
वाला
है
- AMIT SINGH "parwana"
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ज़रा
पाने
की
चाहत
में
बहुत
कुछ
छूट
जाता
है
नदी
का
साथ
देता
हूँ
समुंदर
रूठ
जाता
है
Aalok Shrivastav
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इक
रोज़
इक
नदी
के
किनारे
मिलेंगे
हम
इक
दूसरे
से
अपना
पता
पूछते
हुए
Shahbaz Rizvi
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कभी
दरिया
में
जिनकी
कश्तियाँ
थी
वही
अब
साहिलों
पे
रो
रहे
हैं
Siddharth Saaz
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उतरी
हुई
नदी
को
समुंदर
कहेगा
कौन
सत्तर
अगर
हैं
आप
बहत्तर
कहेगा
कौन
पपलू
से
उनकी
बीवी
ने
कल
रात
कह
दिया
मैं
देखती
हूँ
आपको
शौहर
कहेगा
कौन
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Paplu Lucknawi
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रात
के
जिस्म
में
जब
पहला
पियाला
उतरा
दूर
दरिया
में
मेरे
चाँद
का
हाला
उतरा
Kumar Vishwas
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जो
उस
तरफ़
से
इशारा
कभी
किया
उस
ने
मैं
डूब
जाऊंगा
दरिया
को
पार
करते
हुए
Ghulam Murtaza Rahi
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मैं
हूँ
सदियों
से
भटकता
हुआ
प्यासा
दरिया
ऐ
ख़ुदा
कुछ
तो
समुंदर
के
सिवा
दे
मुझ
को
Afzal Ali Afzal
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तिरे
एहसास
में
डूबा
हुआ
मैं
कभी
सहरा
कभी
दरिया
हुआ
मैं
Siraj Faisal Khan
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पुरानी
कश्ती
को
पार
लेकर
फ़क़त
हमारा
हुनर
गया
है
नए
खेवइये
कहीं
न
समझें
नदी
का
पानी
उतर
गया
है
Uday Pratap Singh
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मत
पूछो
कितना
ग़मगीं
हूँ
गंगा
जी
और
जमुना
जी
ज़्यादा
तुमको
याद
नहीं
हूँ
गंगा
जी
और
जमुना
जी
अमरोहे
में
बान
नदी
के
पास
जो
लड़का
रहता
था
अब
वो
कहाँ
है
मैं
तो
वहीं
हूँ
गंगा
जी
और
जमुना
जी
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Jaun Elia
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मुझ
सेे
बेहतर
क़िस्मत
उनकी
जिनको
तुमने
चाहा
है
तुमको
उन
सेे
प्यार
बहुत
है
उनका
तुम
पर
साया
है
उनकी
ख़ातिर
सब
सेे
पहले
सब
सेे
आगे
हाज़िर
तुम
मेरी
ख़ातिर
कोई
नहीं
है
कोई
नहीं
अब
आया
है
तुम
पर
सारे
गीत
लिखे
थे
सारे
शे'र
तुम्हारे
थे
अब
तो
ना
कोई
शे'र
हुआ
है
गीत
ना
कोई
गाया
है
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AMIT SINGH "parwana"
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रात
भी
इक
परछाई
है
आँखों
के
आगे
छाई
है
इश्क़
किया
दिखता
है
तूने
तेरे
आगे
खाई
है
AMIT SINGH "parwana"
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इस
दुख
से
दो
चार
तो
होना
बनता
है
मिला
के
आँख
प्यार
तो
होना
बनता
है
तुमने
मेरा
हाल
किया
है
मौसम
सा
मौसम
का
बेकार
तो
होना
बनता
है
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AMIT SINGH "parwana"
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