khulii aankhoñ men sapna jhaankta hai | खुली आँखों में सपना झाँकता है

  - Parveen Shakir
खुलीआँखोंमेंसपनाझाँकताहै
वोसोयाहैकिकुछकुछजागताहै
तिरीचाहतकेभीगेजंगलोंमें
मिरातनमोरबनकरनाचताहै
मुझेहरकैफ़ियतमेंक्यूँँसमझे
वोमेरेसबहवालेजानताहै
मैंउसकीदस्तरसमेंहूँमगरवो
मुझेमेरीरज़ासेमाँगताहै
किसीकेध्यानमेंडूबाहुआदिल
बहानेसेमुझेभीटालताहै
सड़ककोछोड़करचलनापड़ेगा
किमेरेघरकाकच्चारास्ताहै
  - Parveen Shakir
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy