जब कभी ख़ूबी-ए-क़िस्मत से तुझे देखते हैं

  - Parveen Shakir
जबकभीख़ूबी-ए-क़िस्मतसेतुझेदेखतेहैं
आइना-ख़ानेकीहैरतसेतुझेदेखतेहैं
वोजोपामाल-ए-ज़मानाहैमेरेतख़्त-नशीं
देखतोकैसीमुहब्बतसेतुझेदेखतेहैं
कासा-ए-दीदमेंबसएकझलककासिक्का
हमफ़क़ीरोंकीक़नातसेतुझेदेखतेहैं
तेरेजानेकाख़यालआताहैघरसेजिसदम
दर-ओ-दीवारकीहसरतसेतुझेदेखतेहैं
तेरेकूचेमेंचलेजातेहैंक़ासिदबनकर
औरअक्सरइसीसूरतसेतुझेदेखतेहैं
कहगईबाद-ए-सबाआजतेरेकानमेंक्या
फूलकिसदर्जातुझेशरारतसेदेखतेहैं
तुझकोक्याइल्मतुझेहारनेवालेकुछलोग
किसक़दरसख़्तनदामतसेतुझेदेखतेहैं
  - Parveen Shakir
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