charaagh-e-raah bujha kya ki rehnuma bhi gaya | चराग़-ए-राह बुझा क्या कि रहनुमा भी गया

  - Parveen Shakir
चराग़-ए-राहबुझाक्याकिरहनुमाभीगया
हवाकेसाथमुसाफ़िरकानक़्श-ए-पाभीगया
मैंफूलचुनतीरहीऔरमुझेख़बरहुई
वोशख़्सकेमिरेशहरसचलाभीगया
बहुतअज़ीज़सहीउसकोमेरीदिलदारी
मगरयेहैकिकभीदिलमिरादुखाभीगया
अबउनदरीचोंपेगहरेदबीज़पर्देहैं
वोताँक-झाँककामा'सूमसिलसिलाभीगया
सबआएमेरीअयादतकोवोभीआयाथा
जोसबगएतोमिरादर्द-आश्नाभीगया
येग़ुर्बतेंमिरीआँखोंमेंकैसीउतरीहैं
किख़्वाबभीमिरेरुख़्सतहैंरतजगाभीगया
  - Parveen Shakir
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy